सर मुझे भेजो... आतंकियों को मिट्टी में मिलाकर ही आऊंगा, अपने कमांडिग अफसर से ऐसा कहा और चला गया मुकाबला करने, पर मिसाल बन जाएगा ये उसने सोचा न था।
सर मुझे भेजो... आतंकियों को मिट्टी में मिलाकर ही आऊंगा, अपने कमांडिग अफसर से ऐसा कहा और चला गया मुकाबला करने, पर मिसाल बन जाएगा ये उसने सोचा न था।तीन आंतकियों को ढेर किया और फिर मौत से हार गया। कुपवाड़ा के हंदवाड़ा में शहीद होने वाले नारनौल के मेजर सतीश दहिया ऑपरेशन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन जो इलाका उनके अधीन नहीं था, वहां पर जाने के लिए खुद अफसर से आग्रह किया था।
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हंदवाड़ा में आतंकियों से लड़ते शहीद हुए मेजर सतीश दहिया
मेजर का जज्बा देखकर अफसर मना नहीं कर सके और उसे भेज दिया। मेजर के साथी शबीर खान बताते हैं कि कुछ दिन पहले उन्हें मेजर दहिया ने रबीन्द्र नाथ टैगोर की कविता भेजी थी। इस कविता को भेजने के बाद मंगलवार शाम करीब 4.55 बजे दहिया से फोन पर बात की। शबीर खान ने बताया कि दहिया ने उन्हें चैलेन्ज किया था कि आज महामुकाबला होगा और आज वह बड़ा मैडल जीतने वाले हैं। सोचा न था कि यह सच हो जाएगा।
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मेजर सतीश दहिया की पत्नी
- फोटो : अमर उजाला
मेजर की बहादुरी का यह किस्सा सुनकर पत्नी सुजाता का सिर गर्व से ऊंचा हो गया। उन्होंने कहा कि उन्हें पति की शहादत पर गर्व है। उनके पति काफी बहादुर थे, इसलिए उन्होंने खुद उस एरिया में लड़ने के लिए जाने का आग्रह किया जो उनके अधीन आता ही नहीं था। सुजाता ने कहा कि पति की बहादुरी ने उसका सिर फक्र से ऊंचा कर दिया। अब वे अपनी इकलौती बेटी को भी आर्मी में अफसर बनाएंगी, ताकि वह अपने पिता के सपनों को पूरा कर सके।
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शहीद मेजर सतीश दहिया का अंतिम संस्कार
शहीद मेजर सतीश दहिया मंगलवार को शहीद हुए थे। उनका पार्थिव शरीर बुधवार शाम नारनौल में स्थित उनके पैतृक गांव बनिहाड़ी पहुंचा और यहां राजकीय सम्मान के साथ शहीद का अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद को उनकी तीन साल की बेटी प्रिया ने दी मुखाग्नि दी। शहादत से पहले इस वीर सपूत ने अपने मंगलवार दोपहर बाद अपनी पत्नी व माता-पिता से फोन से आखिरी बार बात की और उनसे जो कुछ कहा, वह उनके आखिरी संवाद बन गए।