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सेना ने उठाया ये कदम तो घुसपैठ हुई कम, पर आतंकियों ने अपनाया नया तरीका

Sun, 15 Oct 2017 09:23 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 15 Oct 2017 09:23 AM IST
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indian army officer revealed truth of terrorists
Indian Army - फोटो : Amar Ujala
देश में घुसपैठ रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया, लेकिन आतंकियों ने घुसने के लिए नया तरीका अपना लिया है, जिसने सेना के लिए परेशानी खड़ी कर दी है।
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Indian Army - फोटो : File Photo
दरअसल, घाटी में सेना को फ्री हैंड देने के बाद से ही पाक समर्थित आतंकी संगठनों की बेचैनी बढ़ी है। इसी वजह से इन दिनों घाटी में आतंकियों के लिए घुसपैठ थोड़ी मुश्किल हो गई है। पिछले करीब एक साल से घाटी में सैन्य अभियानों की तेजी के बाद से आतंकी संगठनों में जबरदस्त खलबली का माहौल है। ये संगठन आतंकियों को पाक अधिकृत कश्मीर में ट्रेनिंग दिलवाकर एलओसी पार घाटी को दहलाने के लिए भेजते हैं।
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भारतीय सेना
इन संगठनों ने अब घाटी के पहाड़ी जंगलों में ही आतंकी ट्रेनिंग शुरू करवा दी है। ये संगठन घाटी के स्थानीय किशोरों व युवाओं को टारगेट पर रखते हैं, उनके  जहन में जेहाद का जहर भरते हैं और फिर उन्हें ट्रेनिंग के लिए तैयार करते हैं। पहले घाटी के इन किशोरों व युवाओं को एलओसी पार आतंकी कैंपों में ले जाया जाता था, लेकिन अब सरहद पार करना मुश्किल हो चुका है।
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INDIAN ARMY - फोटो : file photo
सेना की खुफिया एजेंसियां लगातार घाटी में चल रहे इन आतंकी कैंपों पर नजर रख रही हैं। घाटी में कई साल गुजार चुके सेना के रिटायर्ड एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी बताया कि अब घाटी में ही स्थानीय आतंकी कैंप लगाए जा रहे हैं और एलओसी एरिया में सुरंगें आतंकियों के लिए घुसपैठ का सेफ जरिया है।
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Indian Army
नाम नहीं छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया कि हर साल सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा घुसपैठ होती है। नवंबर में बर्फबारी से पहले ही हथियारों समेत आतंकी एलओसी पार कर घाटी में घुस जाते हैं, लेकिन इस साल सेना के एक्शन मोड की वजह से घाटी से घुसपैठ अपेक्षाकृत बहुत कम रही। उल्लेखनीय है कि सेना इस साल अभी तक करीब 169 आतंकी मार चुकी है और अपने भी लगभग 61 जवान शहीद हो चुके हैं।
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