भारतीय सेना के जवान अब न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल व केमिकल हमलों के दौरान सुरक्षित पनाह के साथ महफूज रहेंगे। इसके लिए बहुत जबरदस्त इंतजाम किया गया है।
इंटिग्रेटेड फील्ड शेल्टर (एकीकृत क्षेत्र आश्रय) बेहद कारगर होते हैं। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की ओर से तैयार किए गए इन शेल्टर को अब सेना की सभी यूनिटों को उपलब्ध कराया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, एक बिग्रेड को फिलहाल 19 शेल्टर दिए जाएंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके सफल ट्रायल के बाद ही इसे वेस्टर्न, नॉर्दन व साउथर्न कमांड में विभिन्न बिग्रेड में उपलब्ध कराया गया है।
मौजूदा हालात देखें तो भारतीय सेना हर तरह के खतरों से न केवल अलर्ट है, बल्कि इन खतरों से निपटने और बचने की तैयारियां भी मुक्कमल करने में जुटी हुई है। खतरों में न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल व केमिकल (एनबीसी) अटैक की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया जा सकता। लिहाजा सेना इस तरह के ‘एनबीसी’ हमलों को लेकर हमेशा सतर्क रहती है। इसी के मद्देनजर सेना अब अपनी सभी बिग्रेड को इंटिग्रेटेड फील्ड शेल्टर से लैस करने जा रही है।
सेना के एक आला अफसर ने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए फौज के लिए ये शेल्टर बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। एनबीसी हमलों के दौरान जवान इसका आश्रय लेकर तब तक सुरक्षित रह सकते हैं, जब तक हमले का असर खत्म नहीं होता। यह शेल्टर पूरी तरह से मूवेबल हैं। इन्हें नौ गाड़ियों की मदद से कहीं भी ले जाया जा सकता है। युद्ध के दौरान यदि दुश्मन की ओर से न्यूकिलर, बायोलॉजिकल व केमिकल हमला होता है, तो 96 घंटे यानी 4 दिन तक जवान पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। चार दिन बाद ऐसे हमले का असर लगभग खत्म हो जाता है।
एक शेल्टर में 30 जवानों के रहने की व्यवस्था है। ये शेल्टर जमीन से चार मीटर नीचे गड्ढे में तैयार किए जाएंगे। एक तरह से इस शेल्टर को जवानों की कमांड पोस्ट, स्टोरेज, मेडिकल, अवलोकन पोस्ट, रेजिमेंटल ऐड सेंटर और कम्युनिकेशन सेंटर के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस शेल्टर में वेंटीलेशन सिस्टम, जल आपूर्ति, परिशोधन, सीवरेज निपटान, 5 केवी के 3 जेनरेटर, संचार जैसे जीवन समर्थन उपकरण शामिल हैं। साथ ही 200 लीटर पानी के दो टैंक, 1000 लीटर का एक टैंक व 500 लीटर डिस्पोजल टैंक भी मौजूद रहेगा।