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देश में 'स्वर्ग का झरना' जो देखने में 'भूतिया', यहां छिपा अरबों का खजाना, पर नो एंट्री
amarujala.com- Presented by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 05 Jun 2017 09:15 AM IST
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रोहतक में मिली भूतिया बावड़ी
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क्या आप जानते हैं कि देश में 'स्वर्ग का झरना' मौजूद है, जो देखने में भूतिया लगता है। यहां अरबों का खजाना दबा हुआ है, लेकिन इसके अंदर जाने की मनाही है।
रोहतक में मिली भूतिया बावड़ी
हम बात कर रहे हैं, हरियाणा के रोहतक जिले में मौजूद सदियों पुरानी एक बावड़ी के बारे में। अभिलेखगारों के अनुसार, इस बावड़ी में अरबों का खजाना दफन है, लेकिन जो भी अंदर गया, वो वापस लौटा नहीं। इसलिए इसे 'चोरों की बावड़ी' या 'स्वर्ग का झरना' भी कहा जाता है। आगे की स्लाइड में जानिए इसका पौराणिक इतिहास।
रोहतक में मिली भूतिया बावड़ी
बावड़ी में लगे फारसी भाषा के एक अभिलेख के अनुसार इस स्वर्ग के झरने का निर्माण उस समय के मुगल राजा शाहजहां के चैबदार सैद्यू कलाल ने 1069 एएच यानि 1658-59 एडी में करवाया था। यह बावड़ी विशाल है। इसमें एक कुआं है जिस तक पहुंचने के लिए 101 सीढिय़ां उतरनी पड़ती हैं। इसमें कई कमरे भी हैं, जो कि उस जमाने में राहगीरों के आराम के लिए बनवाए गए थे।
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रोहतक में मिली भूतिया बावड़ी
इस बावड़ी को ज्ञानी चोर की बावड़ी के नाम से जाना जाता है। लोगों का कहना है कि ज्ञानी चोर एक शातिर चोर था जो धनवानों का लूटता और इस बावड़ी में छलांग लगाकर गायब हो जाता और अगले दिन फिर राहजनी के लिए निकल आता था। लोगों का यह अनुमान है कि ज्ञानी चोर द्वारा लूटा गया सारा धन इसी बावड़ी में मौजूद है। लोक मान्यताओं के अनुसार ज्ञानी चोर का अरबों का खजाना इसी में दफन है।
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रोहतक में मिली भूतिया बावड़ी
स्थानीय लोगों की मानें तो इसमें सुरंगों का जाल है जो कि दिल्ली और लाहौर तक जाता है। मगर रहस्य आज भी बरकरार है। जानकारों का कहना है कि इस पर फारसी भाषा में ‘स्वर्ग का झरना' लिखा हुआ है। किवदंती है कि अंग्रेजों के समय में एक बारात सुरंगों के रास्ते दिल्ली जाना चाहती थी। कई दिन बीतने के बाद भी सुरंग में उतरे बाराती न तो दिल्ली ही पहुंच पाए और न ही वापस निकले।