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हेरोइन के बाद अब भारत में मिलने लगी है ये खतरनाक ड्रग्स, डॉक्टरों के उड़े होश

Sun, 16 Sep 2018 01:50 PM IST
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 16 Sep 2018 01:50 PM IST
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Ice Drug Enhanced Doctor's Concern after Heroin in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर
हेरोइन के बाद भारत में अब एक और खतरनाक ड्रग्स ने धमक दे दी है। इस ड्रग्स ने डॉक्टरों के भी होश उड़ा दिए हैं। खास बात ये है कि है इसके गिरफ्त में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। आइए जानते हैं इस खतरनाक नशे के बारे में...
Ice Drug Enhanced Doctor's Concern after Heroin in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर
हेरोइन (चिट्टा) के बाद अब नए ड्रग ने सबकी नींद उड़ा दी है। चंडीगढ़ में आइस ड्रग के यूजर बढ़ते जा रहे। इसके बढ़ते इस्तेमाल से पीजीआई के डॉक्टर भी खासे परेशान हैं। यह हेरोइन के विपरीत काम करता है। हेरोइन नर्वस सिस्टम को उदास व डाउन करता है, जबकि आइस ड्रग उत्तेजित कर देता है। इसका आमतौर पर इस्तेमाल रेव पार्टी, डिस्कोथेक और बड़े-बड़े होटलों में किया जाता है। 

चंडीगढ़ में इसका इस्तेमाल धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यह दावा पीजीआई के मनोचिकित्सक विभाग के प्रोफेसरों ने किया है। इस पर खास चरचा करने के लिए पीजीआई में एक नेशनल सीएमई का आयोजन किया है, जिसमें आइस ड्रग के अलावा नशे के आदी में होने वाली दिक्कतों को जानना और उसके इलाज के बारे में भी विस्तार से चरचा की गई।
Ice Drug Enhanced Doctor's Concern after Heroin in Chandigarh
प्रतीकात्मक तस्वीर
पीजीआई स्थित ड्रग डी एडिक्शन के इंचार्ज प्रो. डॉक्टर डी. बासु ने बताया कि एमफिटामिन टाइप स्टिम्युलेटस (एटीएस) नाम के कुछ ड्रग होते हैं। इसकी कैटेगरी में आइस, एमफिटामिन, एक्सटेसी नाम के ड्रग आते हैं। इसमें सबसे अहम आइस ड्रग है, जो धीरे-धीरे इस रीजन में अपनी पहुंच बना रहा है। यह एक उत्तेजक ड्रग है, जो लोगों को एक्टिव कर देता है। जगा देता है।

हार्ट बीट बढ़ती है। चार से पांच घंटे के बाद वे शांत होते हैं। फिर उनमें डिप्रेशन और मायूसी के लक्षण दिखते हैं। कई लोगों में सुसाइड करने की इच्छा उत्पन्न होती है। अपने आपको एक्टिव करने के लिए फिर से लोग आइस लेते हैं। इससे धीरे-धीरे उनमें आदत बन जाती है।
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Ice Drug Enhanced Doctor's Concern after Heroin in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : SELF
आइस जैसा दिखता है इसलिए नाम पड़ा
डॉ. बासु के मुताबिक चिकित्सा भाषा में आइस ड्रग का नाम मैथाफिटामिन है, जो टेबलेट फार्म में मिलता है। इसे सिर्फ इंजेक्ट किया जा सकता है। यह अशुद्ध होता है, जबकि आइस इसका शुद्ध रूप है। जो देखने में बर्फ के छोटे-छोटे टुकड़े जैसा दिखता है, इसलिए इसका नाम आइस ड्रग रखा गया है। 

इसे स्मोक करके लिया जा सकता है। शुद्ध होने के कारण यह काफी तेजी से काम करता है। साल 2015 में डब्ल्यूएचओ ने कई जगह सर्वे किया था। इनमें एक चंडीगढ़ शहर भी शामिल था। यहां पर एटीएस लेने वाले 100 लोगों का इंटरव्यू किया गया, जिनमें सभी यूथ थे। इन लोगों ने बताया कि सबसे ज्यादा वे एक्सटेसी और उसके बाद आइस।
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Ice Drug Enhanced Doctor's Concern after Heroin in Chandigarh
सांकेतिक तस्वीर
हीरोइन से कई गुना महंगा है आइस ड्रग
पीजीआई के डॉक्टरों ने बताया कि उनके यहां पर इलाज कराने आए युवकों से पूछने पर पता चला है कि चंडीगढ़ में हेरोइन का रेट तीन से साढ़े तीन हजार प्रति ग्राम है, जबकि आइस ड्रग का रेट 10 से 15 हजार प्रति ग्राम है। यह मुख्य रूप से होटल, रेव पार्टी और डिस्को में बिकता है। अधिकतर युवक इसे कॉम्बिनेशन ड्रग के साथ लेते हैं। कोई एल्कोहल के साथ तो कोई अन्य ड्रग के साथ। इससे खतरा और बढ़ता है।

नहीं है कोई मेडिसिन, थैरेपी से ही इलाज संभव
पीजीआई के मुताबिक फिलहाल आइस ड्रग के रोगियों को काबू करने के लिए कोई मेडिसिन नहीं है। ऐसे मरीजों को विभिन्न थैरेपी से ठीक करने की कोशिश होती है। चंडीगढ़ में इसका अच्छा-खासा इस्तेमाल किया जाता है। दरअसल, पीजीआई में आइस ड्रग लेने वाले मरीजों से जब पूछा गया कि क्या उनके जैसे कुछ साथी और हैं, तो उन्होंने बताया कि उनके ग्रुप के कई लोग हैं, जो इस तरह की आइस का इस्तेमाल करते हैं।

अभी तो यह कहना मुश्किल होगा कि आइस ड्रग ने चंडीगढ़ में अपनी जड़ें जमा दी हैं। मगर पेरेंट्स और शहरवासी अभी नहीं चेते तो जिस तरह से हेरोइन ने पंजाब ने घर-घर जगह बना ली है, उसी तरह आइस ड्रग को कंट्रोल करना मुश्किल होगा। -प्रो. देवाशीष बासु, इंचार्ज ड्रग डी-एडिक्शन सेंटर पीजीआई
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