28 साल बाद होली पर बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है, ऐसे में होलिका दहन करते समय एक काम भूलकर भी न करें। जानिए किस राशि पर क्या असर होगा।
होलिका दहन 1 फरवरी दिन वीरवार को है और यह पूर्णिमा में किया जाता है। वीरवार को सुबह 8 बजकर 57 मिनट पर पूर्णिमा का प्रारंभ हो रहा है, जो शुक्रवार सुबह छह बजकर 21 मिनट पर हो रही है। यह बात भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही है।
मिश्र ने बताया कि पूर्णिमा के साथ ही भद्रा भी लगा रही है। भद्र और प्रतिपदा में होलिका दहन नहीं किया जाता है। भद्रा काल में होलिका दहन करने से अनिष्ट होने का भय रहता है, पर शाम 7 बजकर 40 मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद से होलिका दहन किया जाना शुभ रहेगा।
मिश्र ने बताया कि इस बार की होली पर शनि धनु राशि में रहेगा। वहीं 28 वर्षों के बाद शनि देवगुरु बृहस्पति की राशि में है। इससे पहले यह 1990 में योग बना था। होली के साथ बसंत ऋतु का भी आगमन होता है।
शुक्रवार को सूर्योदय सुबह छह बजकर 53 मिनट पर है। सत्यनारायण व्रत, पूर्ण चंद्रमा की पूजा और पूर्णिमा का व्रत वीरवार को ही मनाया जाएगा। होली मिलन, होली का रंग खेलना दो फरवरी दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। क्योंकि शास्त्रों में विधान है कि चैत्र कृष्ण प्रतिपदा में होली खेलनी चाहिए।