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गरीब किसान के घर पैदा हुए, मेहनत और लग्न से बने PGI के डॉयरेक्टर
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Mar 2017 09:16 AM IST
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
खेतीबाड़ी करने वाले अनपढ़ पिता के इस होनहार बेटे के जज्बे को सलाम कीजिए। जिस जगह पर लगे पेड़ के नीचे सोता था, आज उसी जगह का वो डायरेक्टर बन गया।
डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
नाम है डॉ. जगतराम। उन्होंने शुक्रवार शाम साढ़े सात बजे कैरों ब्लॉक में उन्होंने चंडीगढ़ पीजीआई के डायरेक्टर का कार्यभार संभाला। डॉ. जगतराम पिछले 38 वर्षों से पीजीआई के ऑप्थल्मोलॉजी (आई) डिपार्टमेंट में हैं। वह दो साल पहले इस विभाग के हेड बने। उनके 300 से ज्यादा रिसर्च पेपर हैं और 40 से ज्यादा नेशनल और इंटरनेशनल प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं। डाक्टर जगतराम बताते हैं कि एमडी की परीक्षा के दौरान पैसे न होने के कारण उन्हें पीजीआई में पेड़ के नीचे सोकर रात गुजारनी पड़ी थी।
डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
डा. जगतराम का जन्म हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजगढ़ के पबियाना गांव के एक गरीब व अनपढ़ किसान ध्यानूराम के घर हुआ। डॉ. जगतराम ने गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल राजगढ़ से पढ़ाई शुरू की। डॉ. जगतराम के पिता ध्यानुराम आज भी खेतीबाड़ी करते हैं। लेकिन ध्यानुराम और फुलमु देवी ने बेटे जगतराम को पढ़ाई पूरी करने का लक्ष्य दिया। डॉ. जगतराम ने पहले गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल से पढ़ाई पूरी की और फिर खुद डॉक्टर बनने का लक्ष्य तय किया। वह अपनी योग्यता, मेहनत और लगन के बल पर यहां तक पहुंचे हैं।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
ये जानते हुए भी कि हिंदी मीडियम में पढ़ने के बाद शिमला जाकर कॉन्वेंट स्कूलों से अंग्रेजी मीडियम में पढ़कर आए स्टूडेंट्स के बीच कड़ी चुनौतियों का सामना करना होगा, उन्होंने आईजीएमसी शिमला से 1973 में एमबीबीएस में एडमिशन हासिल किया। 1979 में पीजीआई ज्वॉइ किया। डा. जगतराम ने बताया कि जब वे 38 साल पहले एमडी की परीक्षा देने आए थे, तब उनकी जेब में पैसे तक नहीं थे। दोस्तों ने फीस और रास्ते के किराए का इंतजाम किया था। उनके पिता की उम्र 94 साल है। अपने सौम्य व्यवहार की वजह से साथियों और मरीजों में काफी लोकप्रिय हैं।
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डॉ. जगतराम बने चंडीगढ़ पीजीआई के नए डायरेक्टर
डॉ. जगतराम की पत्नी आशा, बड़ी बेटी शिखा और उनके पति अमन सिंगला, छोटी बेटी डॉ. शिल्पा और उनके पति स्वनिल बराड़ इस उपलब्धि पर खुश हैं। डायरेक्टर को चुनने के लिए गठित की गई सेलेक्शन कमेटी ने जो मेरिट बनाई गई थी, उसमें उनका तीसरा नंबर था। पहले नंबर पर इंडोक्राइनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अनिल भंसाली, दूसरे नंबर पर पीडियाट्रिक की प्रोफेसर डॉ. मीनू सिंह थी। मेरिट में पहला स्थान होने के कारण डॉ. भंसाली के डायरेक्टर चुने जाने की काफी संभावना जताई जा रही थी, लेकिन यही बात उनके डायरेक्टर बनने में बाधा बन गई।