डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम और उसकी 'दुलारी' हनीप्रीत के लिए अब और ज्यादा मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं। दरअसल, कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं।
डेरा सच्चा सौदा पर लगे मनी लांड्रिंग के आरोपों की जांच करने के लिए सीजेएम कोर्ट ने आयकर विभाग को अनुमति दे दी है। आयकर विभाग की ओर से 17 अक्तूबर को कोर्ट में लगाई गई थी। इस पर बुधवार को सुनवाई करते हुए न्यायाधीश विजय जेम्स ने आयकर विभाग को पुलिस द्वारा डेरा सच्चा सौदा से जब्त किए दस्तावेज और सामान की जांच करने की आज्ञा दी। अर्जी पर सुनवाई से पहले कोर्ट ने शहर थाना पुलिस से अर्जी को लेकर जवाब तलब किया था।
पिछली दो तारीख पर शहर थाना पुलिस पूरा जवाब दाखिल नहीं कर पाई थी। अदालत ने पुलिस को फटकार लगाते हुए बुधवार को हरहाल में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए। शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर राम सिंह ने बुधवार सुबह कोर्ट में जवाब दाखिल किया। जवाब दाखिल करने के बाद न्यायाधीश विजय जेम्स ने आयकर विभाग की ओर से मांगी गई जांच की अनुमति को कुछ हिदायतों के साथ स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि आयकर विभाग की जांच सिरसा पुलिस अधीक्षक की निगरानी में होगी। साथ ही पुलिस अधीक्षक को कड़ी हिदायत दी कि इसका ध्यान रहे कि जो सामान और दस्तावेज डेरा सच्चा सौदा से पुलिस ने बरामद किया है, उससे कोई छेड़छाड़ नहीं की जाए। आयकर विभाग के सीनियर ऑफिसर दाता राम ने सिरसा पुलिस की ओर से डेरा से जब्त किए गए कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, वीडियो कैसेट, फोटो, खाली चेक बुक्स, बैंक पास बुक, सूटकेस आदि उपलब्ध करवाने की मांग की थी।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश देते हुए दो नवंबर को ये तमाम सामान आयकर विभाग को जांच के लिए उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया है। सिरसा पुलिस ने डेरा के खिलाफ अगस्त 2017 को प्रॉपर्टी से जुड़ी एफआईआर 695 दर्ज की थी। इस केस में उक्त सामान बतौर सबूत पुलिस ने जुटाकर सील किया हुआ है। पुलिस ने अदालत को बताया कि उक्त सामान की जांच एसओसी स्पेशलिस्ट अजय कुमार द्वारा की जा चुकी है।