देखिए: प्री मानसून की झमाझम बारिश से पानी-पानी हुआ चंडीगढ़
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सलाहकार परिमल राय ने सोमवार को ही चीफ इंजीनियर मुकेश आंनद और एसई एनपी शर्मा को निर्देश दिया था कि शहर में जलभराव नहीं होना चाहिए। चीफ इंजीनियर और एसई सुबह बारिश के समय फील्ड में निकल गए थे, जहां जहां उन्हें पानी भरा हुआ मिला वहां वहां पर उन्होंने कर्मचारियों से पानी निकलवाया। शहर में कई जगह बारिश बंद होने के बाद भी पानी जमा रहा, जिससे आवाजाही जमकर बाधित रही।
अधिकारियों के अनुसार इस बार रोड गलियों की सफाई का काम देरी से शुरू हुआ है। इसलिए शहर में कई जगह रोड गलियों की सफाई अब तक नहीं हुई है। नगर निगम ने रोड गलियों की सफाई का टेंडर 80 लाख रुपये में अलाट किया गया है। शहर में पानी की निकासी के लिए अंदरुनी ड्रेनेज सिस्टम है, वह काफी कमजोर हो गया है। जन स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ड्रेनेज सिस्टम एक घंटे में 25 मिमी बारिश ही झेल सकता है। इससे ज्यादा बारिश होने पर जलभराव होना तय है। जबकि मानसून में कई बार एक घंटे में 50 से 60 मिमी बारिश भी हो जाती है।
इन स्थानों हुआ जलभराव . सेक्टर-22 की मार्केट के सामने वाली सड़क पर, सेक्टर-17 बस स्टैंड चौक पर, औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीटीयू वर्कशाप के पास के अंडरपास में, सेक्टर-15 से 11 को जाने वाली सड़क पर बने अंडरपास में, सेक्टर-17 स्थित आरबीआई बैंक के सामने बनी अंडरग्राउंड पार्किंग में, सेक्टर-43 बस स्टैंड चौक, पंजाब विश्वविद्यालय के तीन नंबर गेट के पास, सेक्टर-28-29 की विभाजक सड़क, हल्लोमाजरा चौक, मनीमाजरा की अंदरुनी सड़कें, मध्य मार्ग में कई जगह, सेक्टर-26 की मंडी और चौक के पास, अटावा गांव से सेक्टर-35 का जाने वाली सड़क, सेक्टर-40 ए की वी-6 रोड पर,
मानसून कभी भी दस्तक दे सकता है लेकिन नगर निगम की ओर से अभी तक फ्लड कंट्रोल सेंटर नहीं बनाया गया है। जबकि हर साल इस सेंटर का एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाता था, जहां पर 24 घंटे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा लोगों के पास थी।
एनपी शर्मा, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग ने बताया कि तेज बारिश के समय कुछ जगह पानी जमा हुआ था, लेकिन कहीं पर भी स्थायी तौर पर जलभराव की स्थिति नहीं रही। सुबह 11 बजे तक सभी पानी की निकासी हो चुकी थी।