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GST की एक असलियत आई सामने, कहीं आपके साथ भी ऐसा तो नहीं हो रहा
मयंक तिवारी/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sat, 23 Sep 2017 09:02 AM IST
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) का एक ऐसा सच सामने आया है, जिसके बारे में जानेंगे तो सोच में पड़ जाएंगे कि कहीं आपके साथ भी ऐसा तो नहीं हो रहा।
GST BILL
गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) लागू हुए 80 दिन से ज्यादा हो गए हैं मगर उपभोक्ता और व्यापारी को तो छोड़िये सरकारी विभाग भी इसके लिए अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं है। गुड्स सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) सिस्टम पूरी तरह से चालू नहीं हो पाया है। इस वजह से ही रिटर्न फाइल करने का समय भी दो माह बढ़ाया गया।
जीएसटी
जीएसटी के अधिकारियों की के अनुसार ढाई माह से ज्यादा समय बीतने के बाद भी पूरा सिस्टम नहीं बन पाया है। एक राष्ट्र एक कर बाजार के लिए सभी टैक्स एक साथ आकलन करने के लिए जीएसटीएन सिस्टम को सुचारु करने की जरूरत थी मगर अभी तक इस पर काम चल ही रहा है। यह पूरी तरह नहीं चालू हो सका है। इस वजह से बाजार में कुछ लोग जीएसटी के नाम पर मनमानी कर रहे हैं। हर माह जो रिटर्न भरा जाना चाहिए, उसका समय दो माह और बढ़ाना पड़ा है।
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जीएसटी
कड़ाई से नियम लागू न हो पाने से आम जनता से कुछ लोग मनमाने रेट वसूल रहे हैं। व्यापारियों और सीए ही नहीं विभागीय लोगों को भी साइट में परिवर्तन की वजह से दिक्कत आ रही है। देश भर में जीएसटी का रिटर्न भरने वालों, फर्म व कंपनियों की संख्या 84 लाख से अधिक है। इसमें रोजाना बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है। लोगों को पूरे सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं होती है। जिसके कारण साइट हैंग हो जाती है।
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GST BILL
जीएसटीएन की साइट ही पड़ी है बंद
गुड्स सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) की साइट का संचालन बंगलूरु से किया जा रहा है। यह साइट बंद है। इसे ठीक करने के लिए इन्फोसिस आईटी कंपनी से करार हुआ है। जिसे एक माह के भीतर ठीक करने को कहा गया है। विभागीय लोगों का मानना है कि अक्तूबर तक साइट शुरू हो जाएगी। इस वक्त जीएसटी के लिए जिस साइट का इस्तेमाल किया जा रहा है उसकी क्षमता केवल 24 लाख है। जबकि रिटर्न भरने वालों की संख्या 84 लाख से अधिक है।
गुड्स सर्विस टैक्स नेटवर्क (जीएसटीएन) की साइट का संचालन बंगलूरु से किया जा रहा है। यह साइट बंद है। इसे ठीक करने के लिए इन्फोसिस आईटी कंपनी से करार हुआ है। जिसे एक माह के भीतर ठीक करने को कहा गया है। विभागीय लोगों का मानना है कि अक्तूबर तक साइट शुरू हो जाएगी। इस वक्त जीएसटी के लिए जिस साइट का इस्तेमाल किया जा रहा है उसकी क्षमता केवल 24 लाख है। जबकि रिटर्न भरने वालों की संख्या 84 लाख से अधिक है।