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मिलिए दो बहादुर अफसरों से, जिनके कारण सलाखों तक पहुंचे राम रहीम

Mon, 28 Aug 2017 09:36 AM IST
आशीष वर्मा/ सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा/ सुशील गंभीर/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 28 Aug 2017 09:36 AM IST
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gurmeet ram rahim convicted in sadhvi rape case, case fought by ssp dagar
Ram Rahim
हम आपको बताने जा रहे हैं उन दो बहादुर अफसरों के बारे में, जिनके कारण साध्वी रेप केस में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सलाखों तक पहुंचे।
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डागर फिलहाल सीबीआई दिल्ली में तैनात हैं
बाबा राम रहीम को सलाखों के पीछे भेजने में जितना हौसला पीड़ित साध्वियों ने दिखाया, उतनी ही तारीफ सीबीआई के उस अधिकारी की होनी चाहिए, जिसने इस केस को अंजाम तक पहुंचाया। उन्होंने न सिर्फ दुराचार मामले की जांच की बल्कि पत्रकार छत्रपति हत्याकांड की जांच को भी मुकाम तक पहुंचाया। दुराचार केस के जांच अधिकारी एएसपी सतीश डागर फिलहाल सीबीआई दिल्ली में तैनात हैं।
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केस की एक भी तारीख मिस नहीं की
केस की पैरवी जब कोर्ट में शुरू हुई तो डागर ने एक भी तारीख मिस नहीं की। इसका नतीजा यह था कि कोई भी गवाह अपने बयान से नहीं पलटा। डेरा सच्चा सौदा के कृष्ण लाल ने सितंबर 2005 में डागर के खिलाफ मारपीट की शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में डागर को जमानत भी लेनी पड़ी थी। हालांकि हाईकोर्ट ने इस केस को बाद में खारिज कर दिया था।
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कई बार केस छोड़ने की धमकी मिली

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राम रहीम - फोटो : SELF
डागर को कई बार केस छोड़ने की धमकी मिली। डेरा अनुयायी उनका घर तक पीछा करते थे। जब तक केस की गवाहियां बंद नहीं हुईं, तब तक वे बराबर कोर्ट में आते रहे। साध्वियों को खोजना भी बहुत मुश्किल भरा काम था, लेकिन डागर ने इस काम को भी अंजाम तक पहुंचाया।

साध्वियों को गवाही देने के लिए तैयार किया
जिन साध्वियों ने बाबा के खिलाफ गवाही दी थी, वे पहले इसके लिए तैयार नहीं हो रही थीं। दोनों की शादी हो चुकी थी। वे अपनी जिंदगी अच्छी तरह से बसर कर रही थीं। एक साध्वी के ससुराल वाले डेरा के समर्थक थे। ऐसे में वह मुंह खोलने के लिए तैयार नहीं थीं। डागर ने पहले उनके ससुराल वालों को समझाया और फिर साध्वियों को मानसिक रूप से तैयार किया। उनकी सुरक्षा और कोर्ट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उन्होंने संभाली।

रामचंद्र छत्रपति केस को भी मुकाम तक पहुंचाया
पत्रकार रामचंद्र हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाने का श्रेय सीबीआई अधिकारी सतीश डागर को जाता है। रामचंद्र के बेटे अंशुल ने बताया कि जब उसने अपने पिता का केस लड़ने का फैसला लिया तो उन्हें काफी दबाव झेलना पड़ा। मगर सतीश डागर ने उनमें विश्वास पैदा किया। उन्होंने ही अंशुल को हौसला दिया कि वे केस लड़े और सीबीआई की पूरी टीम उनके साथ है। डागर पर नेताओं और अफसरों ने भी काफी दबाव डाला, लेकिन वे बिल्कुल भी नहीं झुके।

सीबीआई के वकील को भी दी जाती थी धमकियां

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Highcourt on Ram rahim
सीबीआई स्पेशल पब्लिक प्रासिक्यूटर एचपीएस वर्मा को इस केस की पैरवी के दौरान लगातार कोर्ट में डेरा अनुयायियों की तरफ से धमकी दी जाती थीं। पटियाला से एचपीएस वर्मा हर तारीख में अकेले आते थे। वर्मा ने बताया कि एक बार उनकी कार को डेरा समर्थकों ने टक्कर मारी लेकिन वे किसी तरह से बच गए। जब सीबीआई कोर्ट अंबाला में थी, तो डेरा अनुयाई एक वकील उन्हें जान से मारने की धमकी देता था, लेकिन उन्होंने केस की पैरवी नहीं छोड़ी।

धारा 376 और 506 के तहत बाबा दोषी करार
नतीजा, साध्वी से रेप करने के मामले में राम रहीम को पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश जगदीप सिंह ने धारा 376 और 506 के तहत दोषी ठहराया है। अदालत अब 28 अगस्त (सोमवार) को सजा पर फैसला सुनाएगी। सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा का कहना है कि इस मामले में बाबा को कम से कम सात साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।
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