जीएसटी एक जुलाई से लागू तो होने जा रहा है, लेकिन इसका सबसे बड़ा झटका तीन उद्योगों को लगेगा और इसका खामियाजा लोगों को भी भुगतना होगा।
दरअसल, जीएसटी के कारण कपड़ा उद्योग, प्लाईवुड और साइंस उपकरण उद्योग गहरे संकट में फंसने वाले हैं। कपड़ा उद्योग पर 5 फीसदी, प्लाइवुड उद्योग पर 28 फीसदी और साइंस उपकरण पर 18 फीसदी कर की मार पड़ने वाली है। यही वजह है कि तीनों क्षेत्रों के कारोबारी परेशान हैं और आंदोलन के मूड में हैं।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ जीएसटी काउंसिल ने हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन की अपील नामंजूर करते हुए इस उद्योग को बड़ा झटका दिया है। यह इंडस्ट्री अब 28 फीसदी टैक्स के दायरे में ही रहेगी। इससे जहां प्लाइवुड खासा महंगा हो जाएगा, वहीं कारोबार पर भी इसका बड़ा विपरीत असर पड़ेगा। प्रदेश में प्लाइवुड का बड़ा कारोबार है।
यमुनानगर में इसकी सबसे ज्यादा करीब 350 इकाइयां हैं और इसका सालाना टर्नओवर 3400 करोड़ से अधिक है। यहां पापुलर और सफेदा की लकड़ी से प्लाइवुड तैयार की जाती है और इसकी सप्लाई विभिन्न शहरों व राज्यों में की जाती है। अब तक यह इंडस्ट्री एक्साइज व वैट के दायरे में आती थी, लेकिन जीएसटी में प्लाइवुड को 28 फीसदी टैक्स स्लैब में रखा गया है।
इसके खिलाफ हरियाणा प्लाइवुड मैन्युफैक्चरर एसोसिएशन ने जीएसटी काउंसिल में अपील दायर की थी। इसमें एसोसिएशन ने मांग रखी थी कि प्लाइवुड पर 28 फीसदी टैक्स तर्कसंगत नहीं है। उनकी मांगी थी कि जीएसटी काउंसिल इस पर पुनर्विचार करे और इसे 18 फीसदी के दायरे में ले आए, लेकिन जीएसटी काउंसिल ने एसोसिएशन की इस अपील को नामंजूर कर दिया है।