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तस्वीरें: शहीद के पार्थिव शरीर को देख छलक गईं आंखें

Sat, 29 Nov 2014 09:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट, जालंध्ार
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट, जालंध्ार Updated Sat, 29 Nov 2014 09:09 AM IST
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तस्वीरें: शहीद के पार्थिव शरीर को देख छलक गईं आंखें

dead body of shaheed solder and Funeral with state honors

जम्मू के पिंडी गांव में फायरिंग में शहीद हुए नायक कुलविंदर सिंह का शव शुक्रवार बाद दोपहर उनके पैतृक गांव गाखल पहुंचा। शहीद के शव को देख पूरे गांव में मातम छा गया। कुलविंदर ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी, इसके बावजूद गोली उसकी छाती के पार हो गई। कुलविंदर सिंह सिख लाइन में नायक के पद पर तैनात थे।

तस्वीरें: शहीद के पार्थिव शरीर को देख छलक गईं आंखें

dead body of shaheed solder and Funeral with state honors

गांव में राजकीय सम्मान के साथ कुलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। सलामी के साथ शहीद को अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान सीपीएस केडी भंडारी के अलावा डीसी कमल किशोर यादव, ब्रिगेडियर बीएस ढिल्लों और कर्नल एचएस सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान शहीद की मां देव कौर और पत्नी राजविंदर कौर को रो-रो कर बुरा हाल था। उनके दुख को देख हर आंख नम हो गई।

तस्वीरें: शहीद के पार्थिव शरीर को देख छलक गईं आंखें

dead body of shaheed solder and Funeral with state honors

शहीद कुलविंदर सिंह के दो बच्चे हैं। पांच साल का बड़ा बेटा जसप्रीत सिंह स्कूल में पढ़ता है। छोटी बेटी भावना की उम्र तीन साल की है। उनके दो भाई और एक बहन है। बड़ा भाई कश्मीर सिंह कुवैत में काम करता है, तो छोटा भाई सुरजीत सिंह बस्ती नौ में काम करता है। बहन मनजीत कौर की शादी हो चुकी है। राजमिस्त्री का काम करने वाले पिता सोहन सिंह बेटे की मौत के बाद से बदहवास हैं।

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तस्वीरें: शहीद के पार्थिव शरीर को देख छलक गईं आंखें

dead body of shaheed solder and Funeral with state honors

फौज में हवलदार जसवंत सिंह ने बताया कि कुलविंदर सिंह की छाती के पास से बुलेट आरपार हो गई थी। कुलविंदर ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी, मगर जैकेट में पूरा शरीर कवर नहीं होता है। कुलविंदर को छाती की राइट साइड से गोली लगी। घायल अवस्था में कुलविंदर को जम्मू अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन उन्होंने बीच रास्ते ही दम तोड़ दिया था।

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dead body of shaheed solder and Funeral with state honors

उनके शव को पठानकोट भेजा गया। पठानकोट कैंट में शहीद को श्रद्धांजलि देने के बाद शव को गाखल लाया गया। कुलविंदर सिंह 1999 में फौज में भर्ती हुए थे। फौज की 15 साल की नौकरी में उन्होंने जम्मू-कश्मीर, असम, देहरादून, राजस्थान और भूटान में काम किया।

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