ओए रब्बा, कित्थे आ मेरा पुत...मैं तां उहनूं कैहंदी रही पुत्त घर आ जा, कई दिनां तों तू घर नहीं आया, पर ओह नई आया...। इकलौते बेटे की मौत पर जार-जार रोई बेसहारा मां।
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- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को सड़क हादसे में मारे गए परमिंदर की मां जसविंदर कौर जैसे ही सिविल अस्पताल पहुंची तो वह अपने बेटे को पुकारते हुए जमीन पर ही बैठ गई। रिश्तेदारों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला और बेटे का मुंह दिखाया। जसविंदर कौर कई बार बेटे को पुकारते हुए बदहवास हुई। परमिंदर की छोटी बहन भी रोते रोते मां को संभालती रही। रिश्तेदारों ने बताया कि परमिंदर सिंह तीन बहन-भाई थे। बड़ी बहन की शादी लोहियां में हुई है और छोटी अभी कुंवारी है।
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परमिंदर सिंह के पिता गुरदयाल सिंह राजमिस्त्री का काम करते थे और दो साल पहले काम करते हुए करंट लगने से उसकी मौत हो गई थी। परमिंदर सिंह परिवार का इकलौता सहारा था, लेकिन कई दिन से घर पर नहीं रह रहा था। जसविंदर कौर ने बताया कि करीब 15 दिन पहले किसी बात को लेकर वह अपनी मुझसे नाराज हो गया था, फिर उसके मामा ने डांट दिया था।
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जसविंदर कौर ने बताया कि वह अपनी बेटी को मिलने लोहियां बस में जा रही थी। जब बस में चढ़ी तो सवारियों ने बताया कि पीछे कॉलेज के पास एक्सीडेंट हुआ है और तीन लोग जख्मी है। उसने गौर नहीं किया और लोहियां पहुंच गई। बेटी के घर पहुंचते ही उसके बेटे के जख्मी होने का फोन आया तो वह उल्टे पांव दौड़ी।
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मृतका रमनदीप कौर की माता सुरजीत कौर का भी रो-रोकर बुरा हाल था। बार-बार बस यही कह रही थी कि रमन...मैं तेरे डैडी नूं की जवाब देऊंगी... बचपन विच्च तां बहुत सांभ-सांभ रखैयाए हुण इह की भाणा वरत गेया...रब्बा। मृतका के भाई सिमरजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता दलजीत सिंह करीब 10 दिन पहले ही काम करने के लिए बहरीन गए थे। उन्हें पता लगेगा तो वह टूट जाएंगे। रब्ब ने पता नहीं साडे तों केहड़ा बदला लेया।