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एक फैसला और 10-10 हजार करोड़ की मालकिन बन गई दो बहनें, पढ़ें केस हिस्ट्री

Mon, 26 Feb 2018 02:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 26 Feb 2018 02:28 PM IST
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court decision in raja harindra singh brar property case
फरीदकोट के राजा की संपत्ति का केस
एक फैसला और दो बहनें अकूत संपत्ति की मालकिन बन गई। दोनों के हिस्से में 10-10 हजार करोड़ आया। केस की हिस्ट्री पढ़ेंगे तो यकीं नहीं होगा कि ऐसा भी हो सकता है।
court decision in raja harindra singh brar property case
फरीदकोट के राजा की संपत्ति का केस
केस, पंजाब में फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह बराड़ की 20 हजार करोड़ रुपये की प्रापर्टी का था। इस प्रॉपर्टी पर अब दोनों राजकुमारियों अमृत कौर और दीपेंदर कौर का बराबर का मालिकाना हक रहेगा। अरबों की इस संपत्ति पर मालिकाना हक को लेकर राजकुमारी दीपेंदर कौर, महरावल खेवाजी ट्रस्ट और राजा के छोटे भाई मंजीत इंदर सिंह के बेटे भरतइंदर सिंह बराड़ ने अपील दायर की थी।
court decision in raja harindra singh brar property case
फरीदकोट के राजा की संपत्ति का केस
एडीजे डॉ. अजीत अत्री की अदालत ने सुनवाई के बाद इस अपील को खारिज कर दिया। साथ ही निचली अदालत द्वारा राजा हरिंदर सिंह बराड़ की 1982 में बनाई गई वसीयत और ट्रस्ट को अवैध ठहराने के आदेश को यथावत रखा है। वहीं, राजकुमारी अमृत कौर ने भी निचली अदालत के आदेश पर उनसे जुड़े कुछ मसलों पर ऊपरी अदालत में क्रास अपील दायर की थी।
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फरीदकोट के राजा की संपत्ति का केस
याचिकाकर्ताओं ने 22 जुलाई, 2013 को तत्कालीन सीजेएम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील दायर की थी। निचली अदालत ने अपने आदेश में राजा हरिंदर सिंह बराड़ की 1982 में बनाई गई वसीयत को अवैध ठहराते हुए राजा की बेटियों राजकुमारी अमृत कौर और राजकुमारी दीपिंदर कौर को संपत्ति पर बराबर का मालिकाना हक दिया था। साथ ही ट्रस्ट को अवैध करार दिया था। इस ट्रस्ट का चेयरमैन दीपेंदर कौर थी।
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फरीदकोट के राजा की संपत्ति का केस
सीजेएम कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राजकुमारी दीपेंदर कौर, राजा के भतीजे भरत इंदर सिंह बराड़ और महरावल खेवाजी ट्रस्ट की ओर से एडीजे कोर्ट में अपील दायर की गई थी। इसमें भरत इंदर सिंह बराड़ की ओर से कहा गया था गया कि, राजघराने के घर का बड़ा पुरुष सदस्य होने के नाते वह संपत्ति के हकदार हैं। ऐसे में राजघराने की संपत्ति को केवल उनकी बेटियों में नहीं बांटा जा सकता।
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