चंडीगढ़ की सांसद और अभिनेत्री किरण खेर मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित हैं। मुंबई में उनका इलाज चल रहा है। यह एक तरह का ब्लड कैंसर है। आमतौर पर यह बीमारी बुजुर्गों की मानी जाती थी लेकिन अब युवा भी इससे पीड़ित हो रहे हैं। 30 से 40 की उम्र के लोगों में मल्टीपल मायलोमा पाया जा रहा है। हालांकि अब तक इसका वैज्ञानिक कारण पता नहीं चल सका है कि यह बीमारी युवाओं में क्यों हो रही। मल्टीपल मायलोमा शरीर में प्लाज्मा (सफेद रक्त कोशिकाओं) के उत्पादन को प्रभावित करता है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हेल्दी प्लाज्मा कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने और एंटीबाडीज को बनने में मदद करती हैं। वहीं कैंसर से त्रस्त प्लाज्मा कोशिकाएं, असामान्य प्रोटीन बनाती हैं। इसे एम प्रोटीन कहते हैं, जो खराब एंटीबाडी का उत्पादन करती है और शरीर के विभिन्न अंग को नुकसान पहुंचाती है।
मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित किरण खेर : कहीं आपको भी तो नहीं ये बीमारी, जानें- लक्षण व बेहतरीन संस्थान
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लगातार पीठ दर्द, थकान और कमजोरी होते हैं प्राथमिक लक्षण
पीजीआई के विशेषज्ञ के मुताबिक यदि किसी मरीज के पीठ में लगातार दर्द बना रहता है। साथ में थकान, कमजोरी के साथ किडनी में दिक्कत रहती है तो यह मल्टीपल मायलोमा के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। इसके लिए मरीजों को ब्लड टेस्ट और किडनी टेस्ट करवाना पड़ता है। इन साधारण टेस्ट के बाद फिजीशियन या कैंसर विशेषज्ञ कुछ एडवांस टेस्ट करवाते हैं, जो मल्टीपल मायोलामा की पुष्टि करते हैं।
पहले की तुलना में अब ठोस इलाज, अच्छे परिणाम
अब भारत में इसका बेहतर इलाज उपलब्ध है। दवाइयां भी सस्ती आ गई है। कुछ दवाइंया इंजेक्शन के माध्यम से दी जाती हैं तो कुछ ओरल दी जाती हैं। चार से छह महीने के इलाज के बाद बोन मैरो ट्रांसप्लांट होता है। लेकिन इससे पहले विशेषज्ञ मरीज का आकलन करते हैं। वे देखते हैं कि मरीज बौन मैरो करवाने में सक्षम है या नहीं। बेहतरीन इलाज से अब पीड़ित का जीवन यापन अच्छा रहता है।
मल्टीपल मायलोमा के इलाज में पीजीआई बेस्ट संस्थान
इस गंभीर बीमारी के इलाज में जो भी विकल्प मौजूद है, वो सब पीजीआई में उपलब्ध है। पीजीआई में इंटरनल मेडिसिन के अंतर्गत अनुभवी डाक्टरों की एक पूरी टीम है, जो वर्षों से पीड़ित मरीज का इलाज कर रहे हैं। सैकड़ों मरीजों का सफल बोन मैरो ट्रांसप्लांट कर उन्हें जीवनदान दिया है। कई अन्य विकल्पों पर भी काम चल रहा है, जिसके अच्छे परिणाम आने की उम्मीद है।
40 साल की उम्र में हर साल किडनी और ब्लड टेस्ट करवाने के बाद फिजीशियन को जरूर दिखाएं। यदि किसी मरीज को लगातार पीठ में दर्द रहता है तो उसे साधारण दर्द मानकर न चलें। मल्टीपल मायलोमा के मरीजों में यह सबसे बड़ा लक्षण देखा गया है। पहले यह बुजुर्गों की बीमारी होती है लेकिन अब युवाओं में भी देखा जा रहा है। डॉ. गौरव प्रकाश, मेडिकल आंकोलाजिस्ट पीजीआई।
यह सब मरीज पर निर्भर करता है कि वह इलाज कहां करवाता है। पीजीआई में मल्टीपल मायलोमा का बेहतरीन इलाज उपलब्ध है। यहां पर डॉक्टर प्रो. पंकज मल्होत्रा व डॉ. गौरव प्रकाश इसके माहिर माने जाते हैं और मुझे इनकी पूरी टीम पर विश्वास के साथ गर्व भी है। प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई, चंडीगढ़।