ताजनगरी में पर्यटन सीजन में इस बार 10 साल का रिकार्ड टूट गया है। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर बदले माहौल और आगरा में इंटरनेट सेवाएं बंद रहने से विदेशों में नकारात्मक मैसेज पहुंचा। पर्यटन उद्योग पर भी बुरा असर पड़ा है। दिसंबर में धड़ाधड़ बुकिंग कैंसिल हुईं। यह आंकड़ा 40 फीसदी को पार कर गया। जनवरी में भी सुधार के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में नये साल के जश्न के कार्यक्रम भी फीके होंगे।
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कोहरे की चादर के चलते ताजमहल नजर न आ सका
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हाल में वर्ष 2016 में नोटबंदी के बाद पर्यटन का ग्राफ गिरा था। वर्ष 2017 से हालात सुधरे। आगरा में पर्यटन सीजन ठीकठाक ही रहा था, लेकिन इस दफा नवंबर में अयोध्या का फैसला और इसके बाद कश्मीर में माहौल बदला। नागरिकता कानून को लेकर बवाल शुरू हो गए। राजधानी दिल्ली में हुए बवाल के बाद तो विदेशी पर्यटकों ने बुकिंग बड़े पैमाने पर कैंसिल करवाईं।
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ताजमहल पर पर्यटक
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देसी पर्यटकों में कमी का कारण मंदी को भी माना जा रहा है। देसी पर्यटकों में भी चालीस फीसदी तक की गिरावट आई है। इस दफा न्यू ईयर के सेलीब्रेशन भी कम होंगे। थ्री स्टार होटलों से लेकर बजट क्लास होटलों में भी बुकिंग कैंसिल हुई हैं। इस दफा न्यू ईयर पर विदेशी पर्यटकों का ताजनगरी में ठहराव कम ही है।
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ताजमहल
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आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फेडरेशन के अध्यक्ष संदीप अरोरा ने बताया कि 10 साल बाद पर्यटन ट्रेड में इस तरह की गिरावट देखी गई है। नोटबंदी के दौरान भी असर पड़ा था, लेकिन इतना व्यापक नहीं था। बदले माहौल के कारण पर्यटकों ने आगरा से दूरी बना ली है। चालीस फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी के पहले पखवाड़े के बाद माहौल में सुधार की उम्मीद है।
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मरियम टूम
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होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि दिसंबर तो नागरिकता कानून के बलवे ने बर्बाद कर दिया। नवंबर से ही माहौल ठीक नहीं चल रहा है। विदेशी पर्यटकों में ज्यादा ऊहापोह रहती है। यही कारण है कि विदेशों से होने वाली बुकिंग पर असर पड़ा है। पर्यटन उद्योग इस दफा भारी संकट से गुजर रहा है।