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आखिर दो भागों में क्यों कटी होती है सांपों की जीभ? महाग्रंथ में छिपा है इस गहरे रहस्य का राज

Sat, 31 Oct 2020 10:05 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Sat, 31 Oct 2020 10:05 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

सांपों को देखकर ही कई लोगों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है। आपने भी अपनी जिंदगी में कई सांप देखे होंगे और इतना तो जरूर जानते होंगे कि सांप की जीभ आगे से दो हिस्सों में बंटी हुई होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है? सांपों की जीभ दो भागों में कटी हुई होने के पीछे एक गहरा रहस्य छुपा हुआ है, जिसका उल्लेख महाभारत में मिलता है। महर्षि वेदव्यास द्वारा लिखी गई महाभारत में सांपों की जीभ से जुड़ी एक बहुत ही रोचक कथा है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

महाभारत के अनुसार, महर्षि कश्यप की 13 पत्नियां थीं। इनमें से कद्रू भी एक थी। सभी नाग कद्रू की ही संतान हैं। वहीं, महर्षि कश्यप की एक अन्य पत्नी का नाम विनता था, जिनके पुत्र पक्षीराज गरुड़ हैं। एक बार महर्षि कश्यप की दोनों पत्नियों कद्रू और विनता ने एक सफेद घोड़ा देखा। उसे देखकर कद्रू ने कहा कि इस घोड़े की पूंछ काली है और विनता ने कहा कि नहीं सफेद है। इस बात पर दोनों में शर्त लग गई।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

तब कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से कहा कि वो अपना आकार छोटा करके घोड़े की पूंछ से लिपट जाएं, ताकि घोड़े की पूंछ काली नजर आए और वह शर्त जीत जाएं। उस समय कुछ नाग पुत्रों ने ऐसा करने से मना कर दिया। तब कद्रू ने अपने पुत्रों को ही शाप दे दिया कि तुम राजा जनमेजय के यज्ञ में भस्म हो जाओगे। शाप की बात सुनकर सभी नाग पुत्र अपनी माता के कहेनुसार उस सफेद घोड़े की पूंछ से लिपट गए, जिससे उस घोड़े की पूंछ काली दिखाई देने लगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

शर्त हारने के कारण विनता कद्रू की दासी बन गईं। जब विनता के पुत्र गरुड़ को ये बात पता चली कि उनकी मां दासी बन गई है तो उन्होंने कद्रू और उनके नाग पुत्रों से पूछा कि तुम्हें मैं ऐसी कौन सी वस्तु लाकर दूं, जिससे कि मेरी माता तुम्हारे दासत्व से मुक्त हो जाएं। तब नाग पुत्रों ने कहा कि तुम हमें स्वर्ग से अमृत लाकर दोगे तो तुम्हारी माता हमारी माता के दासत्व से मुक्त हो जाएंगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

नागपुत्रों के कहने पर गरुड़ स्वर्ग से अमृत कलश ले आए और उसे कुशा (एक प्रकार की धारदार घास) पर रख दिया। उन्होंने सभी नागों से कहा कि अमृत पीने से पहले सभी स्नान करके आएं। गरुड़ के कहने पर सभी नाग स्नान करने चले गए, लेकिन इसी बीच देवराज इंद्र वहां आ गए और अमृत कलश लेकर वापस स्वर्ग चले गए।

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