ये बात तो आपको जरूर पता होगा कि भगवान श्रीकृष्ण को बांसुरी बजाना कितना पसंद था। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण को जितना प्यार राधा से था, ठीक उतना ही प्यार उन्हें अपनी बांसुरी से था। ये दोनों चीजें आपस में एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हुई थी। लेकिन एक समय ऐसा भी आया जब श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी को तोड़ दी। आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े गहरे रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में जब भगवान श्री कृष्ण ने धरती पर जन्म लिया तब देवी-देवता वेश बदलकर समय-समय पर उनसे मिलने धरती पर आने लगे। तभी भगवान शिवजी भी अपने प्रिय भगवान से मिलने के लिए आए। परन्तु वह यह सोच कर कुछ क्षण के लिए रुके कि यदि वे श्री कृष्ण से मिलने जा रहे हैं, तो उन्हें कुछ उपहार भी अपने साथ ले जाना चाहिए। तभी महादेव शिव को याद आया कि उनके पास ऋषि दधीचि की महाशक्तिशाली हड्डी पड़ी है।
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भगवान श्रीकृष्ण (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
महादेव शिवजी ने उस हड्डी को घिसकर एक सुन्दर एवं मनोहर बांसुरी का निर्माण किया। फिर जब शिवजी भगवान श्री कृष्ण से मिलने गोकुल पंहुचे तो उन्होंने श्री कृष्ण को भेट स्वरूप वह बंसी दी। उन्हें आशीर्वाद दिया तभी से भगवान श्री कृष्ण उस बांसुरी को अपने पास रखते हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण और राधा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
जब भी कभी प्रेम की मिसाल दी जाती है, तो राधा-कृष्ण की बात सबसे पहले आती है। राधा-श्रीकृष्ण के प्रेम को जीवात्मा और परमात्मा का मिलन कहा जाता है। श्रीकृष्ण के जितने भी चित्र मिलते हैं, उनमें बांसुरी जरूर रहती है। बांसुरी श्रीकृष्ण के राधा के प्रति प्रेम का प्रतीक है। वैसे तो राधा से जुड़ीं कई अलग-अलग विवरण मौजूद हैं, लेकिन आज हम आपको एक प्रचलित कहानी बता रहे हैं।
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भगवान श्रीकृष्ण और राधा (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
भगवान श्रीकृष्ण से राधा पहली बार तब अलग हुईं, जब मामा कंस ने बलराम और कृष्ण को आमंत्रित किया। वृंदावन के लोग यह खबर सुनकर दुखी हो गए। मथुरा जाने से पहले श्रीकृष्ण राधा से मिले थे। राधा, कृष्ण के मन में चल रही हर गतिविधि को जानती थी। कृष्ण राधा से ये वादा करके गए थे कि वो वापस आएंगे, लेकिन कृष्ण राधा के पास वापस नहीं आए। उनकी शादी भी रुक्मिनी से हुई। रुक्मिनी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए बहुत जतन किए थे।
श्रीकृष्ण से विवाह के लिए वह अपने भाई रुकमी के खिलाफ चली गईं। राधा की तरह वह भी श्रीकृष्ण से प्यार करती थी। रुक्मिनी ने श्रीकृष्ण को एक प्रेम पत्र भी भेजा था कि वह आकर उन्हें अपने साथ ले जाएं। इसके बाद ही कृष्ण रुक्मिनी के पास गए और उनसे शादी कर ली।