शनि के दक्षिणी ध्रुव के ऊपर वैज्ञानिकों को एक ऐसी विशाल वायुमंडलीय आकृति मिली है, जिसके 10 स्पष्ट किनारे हैं। करीब 13 हजार किलोमीटर चौड़ी यह रहस्यमयी संरचना पृथ्वी से भी थोड़ी बड़ी है। वैज्ञानिक अभी यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि शनि के वातावरण में इतनी नियमित ज्यामितीय आकृति आखिर बनी कैसे। उनका मानना है कि तेज हवाओं, जेट स्ट्रीम और किसी बड़े तूफान से पैदा हुई वायुमंडलीय तरंग ने इसके निर्माण में भूमिका निभाई हो सकती है।
शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर नजर आई 13 हजार किमी चौड़ी रहस्यमयी आकृति, देखकर हैरत में पड़े वैज्ञानिक
वैज्ञानिकों को शनि ग्रह के दक्षिणी ध्रुव पर 10 किनारों वाला नया वायुमंडलीय पैटर्न मिला है। यह रहस्यमयी संरचना पृथ्वी से भी थोड़ी बड़ी है, जिसकी चौड़ाई 13 हजार किलोमीटर है। इस नए वायुमंडलीय पैटर्न को देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
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वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इसलिए भी अप्रत्याशित है क्योंकि शनि के चारों ओर लंबे समय से कई तरह की वायुमंडलीय हलचल देखी जाती रही है, लेकिन दक्षिणी ध्रुव पर इतनी व्यवस्थित 10-किनारों वाली संरचना पहले नहीं देखी गई थी।
You: What could be stranger than a giant, evolving, 10-sided atmospheric wave encircling Saturn's south pole?
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उत्तर में भी है ऐसी रहस्यमयी आकृति
शनि का उत्तरी ध्रुव भी दशकों से वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा है। वहां बादलों और हवाओं से बना एक विशाल षट्भुज यानी छह किनारों वाला पैटर्न मौजूद है। इसकी पहली पहचान 40 साल से भी अधिक पहले हुई थी और यह आज भी कायम है।नई दक्षिणी संरचना उससे मिलती-जुलती जरूर है, लेकिन दोनों में अंतर भी हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिणी ध्रुव का दशभुज उत्तरी षट्भुज की तुलना में थोड़ा बड़ा है और शनि के घूर्णन के साथ इसकी गति में भी कुछ ज्यादा बदलाव दिखाई देता है।
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तेज हवाओं और तूफान से बनने का अनुमान
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दशभुज के निर्माण के पीछे शनि के दक्षिणी ध्रुव के पास चलने वाली शक्तिशाली जेट स्ट्रीम हो सकती है। तेज हवाओं के बीच वातावरण में बनने वाली बड़ी तरंग ने संभवतः इस पैटर्न को 10 किनारों का आकार दिया। इसके आसपास आए किसी बड़े तूफान का भी इससे संबंध हो सकता है। हालांकि वैज्ञानिक अभी इसे निश्चित कारण नहीं मान रहे हैं। नासा की एमी साइमन के मुताबिक यह बेहद जटिल तरल-गतिकी की प्रक्रिया है और यह आकृति शनि के बादलों के नीचे गहराई में चल रही प्रक्रियाओं के बारे में भी संकेत दे सकती है।
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आगे खुल सकता है रहस्य
शनि की कक्षा में कोई अंतरिक्ष यान 2017 के बाद से नहीं रहा है। इसलिए यह पता लगाना मुश्किल है कि दशभुज वास्तव में कब बना। यह कितने समय तक कायम रहेगा, यह भी स्पष्ट नहीं है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप समेत अन्य दूरबीनों से इसके लगातार अध्ययन की तैयारी है।वैज्ञानिकों के लिए यह खोज इस बात का एक और प्रमाण है कि शनि एक बेहद गतिशील और लगातार बदलता हुआ ग्रह है। बृहस्पति के ध्रुवों पर चक्रवाती तूफानों की व्यवस्थित संरचना जरूर देखी गई है, लेकिन किसी दूसरे ग्रह पर ऐसी नियमित बहुभुजीय वायुमंडलीय आकृति अब तक नहीं देखी गई थी।