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Google Doodle On Satyendra Nath Bose: सत्येंद्र नाथ बोस को गूगल ने ऐसे किया याद, भारत के महान वैज्ञानिक के मुरीद थे आइंस्टीन 

Sat, 04 Jun 2022 01:54 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sat, 04 Jun 2022 01:54 PM IST
सार

सत्येंद्र नाथ बोस ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में साल 1916 से लेकर 1921 फिजिक्स लेक्चरर के तौर पर काम किया। वह पोस्टग्रेजुएट के छात्रों को प्लैंक रेजिएशन फॉर्मूला पढ़ा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कणों की गणना के तरीके पर सवाल खड़ा किया। इसके बाद बोस अपने सिद्धांतों के साथ प्रयोग करने लगे। 

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Satyendra Nath Bose Google Doodle Know About Satyendra Nath Bose News in Hindi
सत्येंद्र नाथ बोस को गूगल ने ऐसे किया याद - फोटो : Google

विस्तार

Google Doodle On Satyendra Nath Bose: गूगल ने आज (04 जून 2022) भारत के महान मैथेमैटिशियन और थेओरिटिकल फिजिक्स में महारथी वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस को डूडल बनाकर याद किया है। आज ही के दिन उन्होंने साल 1924 में अल्बर्ट आइंस्टीन को क्वांटम फॉर्मूलेशन भेजे थे। आइंस्टीन ने इसको बेहद महत्वपूर्ण खोज के रूप में मान्यता दी। कहा जाता है कि बोस अल्बर्ट आइंस्टीन को अपना गुरु मानते थे। गूगल की तरफ से सत्येंद्र नाथ बोस और 'बोस-आइंस्टीन कंडेनसेट' में उनके योगदान को सिलेब्रेट करने के लिए डूडल बनाया है। सत्येंद्र नाथ बोस की क्वांटम थ्योरी के महान वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टाइन भी मुरीद थे। 
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भारत के महान वैज्ञानिक सत्येंद्र नाथ बोस का जन्म 1 जनवरी, 1894 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता में हुआ था। सत्येंद्र नाथ बोस के पिता का नाम सुरेंद्र नाथ बोस था जो ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी के इंजीनियरिंग विभाग में काम करते थे। सत्येंद्र नाथ के सात बच्चे थे जिसमें सुरेंद्र नाथ बोस सबसे बड़े थे। 
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सुरेंद्र नाथ बोस ने कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से विज्ञान स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से अप्लाइड मैथ्स में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली। उन्होंने दोनों डिग्रियों में अपने क्लास में टॉप किया था। इसके बाद साल 1916 में बोस ने कोलकाता विश्वविद्यालय के 'साइंस कॉलेज में रिसर्च स्कॉलर के तौर पर एडमिशन लिया। यहां से उन्होंने थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी की पढ़ाई की। 
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सत्येंद्र नाथ बोस भौतिक विज्ञानी जगदीश चंद्र बोस और इतिहासकार प्रफुल्ल चंद्र रे से प्रेरित थे। सत्येंद्र नाथ बोस ने कलकत्ता विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में साल 1916 से लेकर 1921 फिजिक्स लेक्चरर के तौर पर काम किया। वह पोस्टग्रेजुएट के छात्रों को प्लैंक रेजिएशन फॉर्मूला पढ़ा रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कणों की गणना के तरीके पर सवाल खड़ा किया। इसके बाद बोस अपने सिद्धांतों के साथ प्रयोग करने लगे। 

सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में शामिल किया गया पेपर

सत्येंद्र नाथ बोस ने प्लैंक लॉ एंड द हाइपोथिसिस ऑफ लाइट क्वांटा नामक एक रिपोर्ट लिखी। इसमें उन्होंने अपने निष्कर्षों के बारे में बताया था। उन्होंने अपने पेपर को विज्ञान पत्रिका द फिलॉसॉफिकल मैगजीन को भेजा, लेकिन उनके शोध को खारिज कर दिया। फिर उन्होंने साल 4 जून 1924 को दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को अपना पेपर भेजा। अल्बर्ट आइंस्टीन ने बोस के रिसर्च पेपर के आधार पर कई शोध किए। बोस का सैद्धांतिक पेपर क्वांटम सिद्धांत में सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में शामिल किया गया। 


पद्म विभूषण से किया गया सम्मानित

सत्येंद्र नाथ बोस को भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण से सम्मानित किया। बोस ने भारतीय भौतिक समाज, राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान, भारतीय विज्ञान कांग्रेस और भारतीय सांख्यिकी संस्थान समेत कई वैज्ञानिक संस्थानों में प्रमुख के रूप में काम किया। उनको वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद का सलाहकार भी बनाया गया था। इसके बाद वह रॉयल सोसाइटी के फेलो बन गए। 
 
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