Punishment in China: क्रूरता के लिए पूरी दुनिया में चीन जाना जाता है। अब इस बीच एक हजारों साल पूराने कंकाल ने चीन की क्रूरता के रहस्य को उजागर किया है। वैज्ञानिकों ने एक चीनी महिला के कंकाल पर रिसर्च किया है। महिला का कंकाल 3000 साल पुराना है। इस शोध से सामने आया है कि प्राचीन काल में चीन में बेहद क्रूरता से सजा दी जाती थी। एक्टा एंथ्रोपोलोजिका सिनिका (Acta Anthropologica Sinica) जर्नल में एक शोध प्रकाशित किया गया है। इस शोध से रूह को कंपा देने वाला खुलासा हुआ है। बताया गया है कि महिला को सजा देने के लिए उसके पैर को काट दिया गया था।
Punishment in China: कंकाल ने खोले चीन की क्रूरता के रहस्य, दी जाती थीं ऐसी खौफनाक सजाएं, जानकर कांप जाएगी रूह
1000 सालों तक दी जाती थी प्राचीन सजा
साल 2019 के एक रिसर्च में बताया गया था प्राचीन काल में 1,000 से ज्यादा सालों तक आमतौर पर यू की सजा दी जाती थी। इस सजा को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में खत्म किया गया था। ली नैन ने बताया है कि महिला जब जिंदा थी उस समय 500 से ज्यादा अलग-अलग अपराधों के लिए सजा दी जाती थी। लेकिन महिला को क्यों सजा दी गई थी यह पता नहीं चल पाया है।
दी जाती थीं खौफनाक सजाएं
इतिहासकारों के मुताबिक, 2000 ईसा पूर्व चीन के पहले जिया राजवंश के सम्राट गुलामों को जो पांच सजा देते थे उनमें एक यू थी। साल 1975 में जॉर्जिया जर्नल ऑफ इंटरनेशनल एंड कम्पेरेटिव लॉ में एक रिसर्च प्रकाशित किया गया था जिसके मुताबिक, छोटे अपराधों के लिए मार-पीट की सजा दी जाती थी। लेकिन बड़े अपराधों के लिए पांचों में एक सजा दी जाती थी।
मो (Mo)
इस सजा में चेहरे या माथे पर टैटू बनाया जाता था जो कभी न मिट सके।
यी (Yi)
इस सजा में अपराधी की नाक को काट दिया जाता था।
यू (Yue)
यू सजा में अपराध करने वाले के पैर को काटा जाता था। अगर किसी ने ज्यादा गंभीर अपराध किया है, तो उसके दोनों पैर काट दिए जाते थे।
गोंग (Gong)
अपराधियों का बेहरमी से पूर्ण बधिया किया जाता था।
दा पी (Da Pi)
पांचवी और सबसे खतरनाक सजा में अपराध के लिए इंसानों को मौत की सजा दी जाती थी। इसमें दर्दनाक मौत, सिर को धड़ से अलग करना, अपराधी को जिंदा उबाल देना या घोड़ों द्वारा शरीर को चीर दिया जाता था।
हालांकि बाद में हान राजवंश के सम्राट वेन ने इन खौफनाक सजाओं को दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में समाप्त कर दिया। इन सजाओं की जगह जुर्माना, कोड़े मारना, कड़ी मेहनत और निर्वासन जैसी सजा दी जानी लागू की गई। लेकिन बुरे अपराधियों को मौत की सजा ही दी जाती थी।