पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में अब महिला कमांडो को स्केटिंग करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि, ये स्केटिंग कोई शौकिया या स्पोर्ट के लिए नहीं बल्कि अपराधियों को पकड़ने के लिए की जा रही है। ये महिला कमांडो पैरों पर स्केट्स पहने हुए कराची की सड़कों पर घूमेंगी और अगर कोई संदिग्ध समझ में आया, तो उन्हें पकड़ेंगी।
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महिला कमांडो
- फोटो : सोशल मीडिया
करीब 15 मिलियन आबादी वाला पाकिस्तान का कराची शहर ना ही केवल व्यापार और व्यावसाय का केंद्र है, बल्कि पाकिस्तान का ये हिस्सा देश में सबसे अधिक राजस्व भी पैदा करता है। लेकिन इस शहर का एक पहलू ये भी है कि ये साथ-साथ में अपराध का केंद्र बन चुका है, जहां दुनिया के सबसे अधिक मोस्ट वॉन्टेड अपराधियों के तार जुड़े हैं।
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महिला कमांडो को लेकर पाकिस्तान ऐसे प्रयोग पहले भी कर चुका है। जब साल 2018 में कराची में जब चीनी वाणिज्यिक दूतावास पर चरमपंथियों ने हमला किया, तो सुहाई अजीज तालपुर नामक एक महिला कमांडो ने जिस तरह बहादुरी दिखाई, उससे वो पूरे पाकिस्तान में चर्चाओं में आ गई थीं। सुहाई अजीज औरतों का एक मजबूत चेहरा बनकर उभरीं।
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पाकिस्तान में महिलाओं के फोर्स से जुड़ने का इतिहास काफी पुराना है। यहां के ह्यूमन राइट्स कमीशन के साल 2010 में जारी डाटा के मुताबिक, सबसे पहले 1939 में सात महिला कॉस्टेबलों ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में चल रहे एक अभियान में भाग लिया था। इसके बाद साल 1952 में ये संख्या 25 पार कर गई। हालांकि, आतंकवाद निरोधक दस्ते में महिलाओं की नियुक्ति बहुत बाद में नवंबर साल 2014 से होनी शुरू हुई।
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आतंकवाद निरोधक दस्ते के लिए महिलाओं का प्रशिक्षण भी एकदम पुरुषों की तरह होता है। महिलाओं को भी राइफल चलाने से लेकर ग्रेनेड चलाने और खतरनाक इलाकों में आतंकी साजिशें विफल करते हुए आगे बढ़ने की इन्हें ट्रेनिंग मिलती है। पाकिस्तान में महिला आतंकवाद निरोधक दस्ते की मॉटो लाइन है- Respect us, fear us यानी हमारा सम्मान करें, हमसे डरें।