नेपाल में आई अचानक बाढ़ से मची तबाही की तस्वीरें और वीडियो रोंगटे खड़े करने वाले हैं। नेपाल के रसुवा जिले में आई भयानक बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 469 तक पहुंच गई, जबकि 1545 लोग लापता है। यह जानकारी नेपाल पुलिस की तरफ से दी गई है। सबसे डरावनी बात यह है कि नेपाल पर संकट अभी टला नहीं है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने कहा है कि नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बन गई है। गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो गया था और झील पहले से ओवरफ्लो हो रही है। मंत्रालय ने झील में आने वाले तीन दिनों में और 30 लाख घन मीटर पानी आने का अनुमान जताया है। इससे झील के फटने का खतरा बहुत ज्यादा बना हुआ है।
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नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। इसके बाद अब नई तबाही आने को तैयार है। चीन ने इसे लेकर चेतावनी जारी की है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ी बैरियर झील बन चुकी है।
अगर यह झील अचानक टूटती है, तो इसके सिर्फ कल्पना कर सकते हैं। 26 अगस्त को तिब्बत इलाके में ग्लेशियर टूटकर नीचे गिरने से ल्हेंडे नदी ब्लॉक हो गई और उसके टूटने के बाद सैलाब नीचे आया। इसके बाद तिब्बत के ग्यीरोंग पोर्ट को लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड ने चपेट में ले लिया, जिसके बाद भयानक तबाही मची।
कभी भी फट सकती है झील
नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास एक बैरियर झील बन चुकी है। यह नदियां तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशुली/भोटेकोशी रिवर सिस्टम में शामिल हो जाती हैं। यह क्षेत्र चीन-नेपाल सीमा के नजदीक और ग्यीरोंग पोर्ट से ऊपर है। इस झील में 50 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा होने का अनुमान है। इससे प्राकृतिक रूप से बने बांध के फटने का उच्च खतरा है। अगर यह बांध टूटता है, तो अचानक बाढ़ आ सकतीहै, तो नीचे की तरफ भीषण तबाही मचा सकती है।
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चीन ने जारी किया अलर्ट
चीन की सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इस झील को लेकर जरूरी चेतावनी जारी की है और अलर्ट घोषित किया है। हाइड्रोजियोलॉजिस्ट ने अनुमान जताया है कि आने वाले तीन दिनों में इस प्राकृतिक बांध में और 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी आने का अनुमान है।
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भारत से कितनी दूर है यह क्षेत्र
भारत से यह क्षेत्र सटा हुआ नहीं है, लेकिन इसका नदी तंत्र भारत से जुड़ा है। भारत की सीमा से लगभग 120 से 140 किलोमीटर उत्तर में झील और दोनों नदियों का संगम है। भूवैज्ञानिक दूरी भले ही भारत से बहुत ज्यादा न हो, लेकिन असली चिंता नदी के रास्ते से जुड़ाव को लेकर है। इस इलाके से निकलकर पानी नेपाल के रास्ते आगे बढ़ता है और फिर गंडक नदी के जरिए बिहार में जाता है।