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नेपाल की बाढ़ सिर्फ शुरुआत! दुनिया के इन देशों में भी मच सकती है भयानक तबाही, वैज्ञानिकों ने दी खतरनाक चेतावनी

Sat, 29 Aug 2026 04:42 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह Updated Sat, 29 Aug 2026 04:42 PM IST
सार

नेपाल बाढ़: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दुनिया के कई देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। उनका कहना है कि दुनिया भर की डेढ़ करोड़ आबादी खतरे में है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने क्या कहा है? 

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दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा! - फोटो : AI

नेपाल बाढ़: नेपाल–तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भयानक तबाही मचाई है। इस प्राकृतिक आपदा में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि लांगटांग–लिरुंग पर्वत पर ग्लेशियर के ढहने से यह आपदा आई। लेकिन इस घटना की पूरी और सटीक जानकारी सामने आने में कई महीने लग सकते हैं। विशेषज्ञों की तरफ से पहले ही चेतावनी दी जा रही है कि यह कोई एक बार होने वाली घटना नहीं है।



एक मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लीड्स विश्वविद्यालय के ग्लेशियल बाढ़ विशेषज्ञ डॉ. जोनाथन कैरिविक ने बताया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से पहाड़ गर्म हो रहे रहे हैं। इससे पर्माफ्रॉस्ट (जमी हुई बर्फ) और ग्लेशियर तेजी से पिघल रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसकी वजह से इस तरह की घटनाओं की संभावना और संभवतः इससे भी बड़ी घटनाएं भविष्य में ज्यादा बढ़ सकती है। 

शोधकर्ताओं ने अनुमान जाताया है कि दुनिया भर में करीब 1.5 करोड़ लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं, जहां उन पर इस तरह की आपदाओं का खतरा है। एशिया में हिमालय, काराकोरम, हिंदूकुश और आसपास की पर्वत श्रृंखलाएं सबसे ज्यादा जोखिम क्षेत्रों में शामिल हैं। हालांकि, अमेरिका और कनाडा में रहने वाले लोगों पर भी खतरा है।

डॉ. कैरिविक ने चेतावनी दी है कि उत्तरी अमेरिका में भी नेपाल जैसी घटना हो सकती है। हालांकि, वैज्ञानिक अभी भी इस आपदा को समझने में लगे हुए हैं। वर्तमान प्रमाण में संकेत मिलता है कि नेपाल में  विनाशकारी बाढ़ संभवतः ग्लेशियर के ढहने से आई थी।
 

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दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा! - फोटो : ANI

डॉ. जोनाथन कैरिविक का कहना है कि नेपाल की यह घटना एक बड़े चट्टान के टूटने या खिसकने जैसी प्रतीत होती है, जिसने ग्लेशियर के एक बड़े हिस्से को भी अपने साथ नीचे लकेर आ गई। करीब 50 प्रमुख विशेषज्ञों वाले शोध समूह Antarctic Glaciers के मुताबिक, प्रारंभिक विश्लेषण से जानकारी मिलती है कि बाढ़ आने से कुछ समय पहले भूस्खलन हुआ और ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया।

इससे बर्फ और चट्टानें पहाड़ से तेजी से नीचे आईं, जिसके बाद पहले आई बाढ़ों से जमा तलछट के साथ मिल गईं। इसकी वजह से ल्हेंडे खोला नदी कुछ समय के लिए अवरुद्ध हो गई। इसका नतीजा यह हुआ है कि अस्थायी रूप से एक बड़ी झील बन गई और बाद में यह झील अचानक टूट गई। 

झील के पानी ने विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया। पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं और जलवायु परिवर्तन की वजह से इनके ज्यादा नियमित रूप से होने की आशंका है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 2021 में चट्टानों और बर्फ के बड़े पैमाने पर टूटकर गिरने से एक घातक मलबा प्रवाह (debris flow) हुआ था, जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत हुई और दो जलविद्युत संयंत्रों को नुकसान पहुंचा।

फिर कनाडा में वर्ष 2020 में एक चट्टानी भूस्खलन हुआ और करीब 1.8 करोड़ घन मीटर चट्टान एक ग्लेशियल झील में जा गिरी। इसकी वजह से करीब 100 मीटर ऊंची लहरें उठीं और लगभग 10 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को तबाह कर दिया। 

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दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा! - फोटो : ANI

वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी है कि पर्वतीय इलाके एक अन्य खतरे के प्रति तेजी से संवेदनशील होता जा रहे हैं, जिसे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। यह तब होता है, जब ग्लेशियर से पिघला पानी एक बड़ी झील का निर्माण कर देता है और यह झील एक पतले तथा अस्थिर प्राकृतिक बांध के पीछे रुकी रहती है। अगर ग्लेशियर का कोई हिस्सा ढह जाए या पिघले हुए पानी का स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो यह प्राकृतिक बांध टूट सकता है। इसके बाद पानी का एक बेहद शक्तिशाली प्रवाह पहाड़ से नीचे की तरफ तबाही मचा सकता है।

हालांकि, वैज्ञानिक फिलहाल यह नहीं मान रहे हैं कि नेपाल और तिब्बत में आई भयानक बाढ़ GLOF की वजह से आई थी, क्योंकि उपग्रह तस्वीरों में भूस्खलन से पहले इस क्षेत्र में किसी बड़ी झील के बनने के प्रमाण नहीं मिले हैं। फिर भी दुनिया भर में ग्लेशियर अब ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस तरह की बाढ़ के खतरे में डाल रहे हैं, जो नेपाल में देखी गई घटना जितनी ही या उससे भी अधिक घातक साबित हो सकती है। 
वैज्ञानिकों ने नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अपने शोधपत्र में नवीनतम मॉडलिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया है और यह पता लगाया कि GLOF का खतरा किन इलाकों में सबसे ज्यादा है। उन्होंने शोध में पता लगाया कि इस खतरे में रहने वाले 1.5 करोड़ से ज्याजा लोगों में आधे से ज्यादा लोग सिर्फ चार देशों, भारत, पाकिस्तान, पेरू और चीन में रहते हैं।

हाई माउंटेन एशिया (HMA), जिसमें हिमालय, काराकोरम, हिंदूकुश और आसपास की पर्वत श्रृंखलाएं शामिल हैं और यह सबसे ज्यादा जोखिम वाले क्षेत्रों में है। इन इलाकों में लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं और ग्लेशियल झीलों के सबसे पास रहते हैं। इन इलाको में 10 किलोमीटर से कम दूरी पर 10 लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। दुनिया में GLOF के खतरे में आने वाली जनता में से करीब 62 फीसदी लोग हाई माउंटेन एशिया में रहते हैं। इनमें करीब 30 लाख भारत में और 20 लाख पाकिस्तान में हैं।

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दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा! - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-ग्राफिक्स

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्लायमाउथ विश्वविद्यालय में भौतिक भूगोल के एसोसिएट प्रोफेसर और शोध के सह-लेखक डॉ. मैट वेस्टोबी का कहना है कि हाई माउंटेन एशिया दुनिया के सबसे तेजी से गर्म हो रहे इलाकों में से एक है। इस इलाके में तेजी से पिघलते ग्लेशियर, बढ़ती पानी की झीलें और दुनिया के कुछ सबसे खड़े पर्वत मौजूद हैं। जलवायु जैसे जैसे गर्म होती है, ग्लेशियर सिकुड़ते जाते हैं और जमी हुई बर्फ पिघलती है।

इसके कारण पहाड़ों की ढलानें अस्थिर हो सकती हैं और चट्टान गिरने, भूस्खलन तथा हिमस्खलन होने का खतरा बढ़ सकता है। डॉ. वेस्टोबी ने कहा कि इन घटनाओं से खतरनाक घटनाओं की श्रृंखला शुरू हो सकती हैं। इसमें बर्फ और पानी की विशाल मात्रा अचानक नीचे की तरफ बह सकती है, जो आबादी वाले इलाकों में नेपाल की तरह भयानक तबाही मचा सकती है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने कहा कि एंडीज पर्वत इलाका एक ऐसा क्षेत्र है, जिसके खतरे को बीते शोधों में काफी कम आंका गया हो सकता है। 1990 के बाद से इस इलाके में ग्लेशियल झीलों की संख्या 93 फीसदी बढ़ी है, तो वहीं हाई माउंटेन एशिया में यह 37 फीसदी बढ़ी है। बताया गया है कि पेरू दुनिया का तीसरा सबसे खतरनाक देश है और दुनिया की तीन सबसे अधिक जोखिम वाली नदी घाटियों में से दो एंडीज इलाके में है, पेरू की सांता नदी घाटी और बोलीविया की बेनी नदी घाटी।

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दुनिया के इन देशों पर नेपाल जैसी तबाही का खतरा! - फोटो : ANI

शोध की सह-लेखक और न्यूकैसल विश्वविद्यालय की ग्लेशियोलॉजिस्ट प्रोफेसर रेचल कैर का कहना है कि इस बात का ध्यान रखना अहम है कि खतरा केवल ग्रामीण आबादी तक सीमित नहीं है। बड़े शहर भी पानी के लिए एंडीज के ग्लेशियरों पर निर्भर हैं। सिर्फ इन्हीं संवेदनशील इलाकों तक खतरा सीमित नहीं है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, उत्तरी अमेरिका, विशेष तौर पर प्रशांत उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र और कनाडा, तथा आल्प्स पर्वत क्षेत्र भी GLOF के खतरे में हैं। यह निश्चित है कि इस तरह की घटनाएं पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही हैं।

उनका कहना है कि कारण यह है कि इनके नीचे की तरफ रहने वाली आबादी बढ़ रही है। इससे अधिक लोग और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे जोखिम में आ रहे हैं। इस खतरे को और यह बात और गंभीर बनाती है कि विशेषज्ञ निश्चित रूप से यह नहीं बता सकते कि अगली विनाशकारी बाढ़ कहां और कब आएगी। इसलिए भविष्य में नेपाल जैसी ही कोई घटना हो सकती है, लेकिन वह कब और कहां होगी, यह बताना बहुत मुश्किल है।

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