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भारत के वो राज्य, जहां जाने के लिए देश के ही लोगों को लेना पड़ता है 'वीजा'

Mon, 12 Aug 2019 04:25 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Mon, 12 Aug 2019 04:25 PM IST
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Nagaland Arunachal Pradesh and Mizoram where indian people can not go without inner line permit
नागालैंड - फोटो : Social media

आमतौर पर लोगों को विदेश जाने के लिए वीजा की जरूरत पड़ती है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में ही कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां जाने के लिए देश के ही लोगों को 'वीजा' लेना पड़ता है। यहां बिना वहां की राज्य सरकार की अनुमति के आप राज्य की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकते। 

Nagaland Arunachal Pradesh and Mizoram where indian people can not go without inner line permit
मिजोरम की खूबसूरती - फोटो : Social media

देश के उत्तरपूर्व में बसे तीन खूबसूरत राज्य मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में ये नियम लागू हैं। इन राज्यों में 'इनर लाइन परमिट' लिए बगैर कोई भी भारतीय नागरिक राज्य की सीमा में घुस भी नहीं सकता। केवल स्थानीय निवासियों को ही राज्य में कहीं भी  बेरोकटोक घूमने की छूट है।

Nagaland Arunachal Pradesh and Mizoram where indian people can not go without inner line permit
अरुणाचल प्रदेश - फोटो : Social media

दरअसल, इनर लाइन परमिट एक प्रकार का आंतरिक वीजा है। यह ठीक वैसे ही है, जैसे कि बतौर विदेशी नागरिक हम किसी और देश में जाने के लिए वीजा लेते हैं। इनर लाइन परमिट नौकरी और पर्यटन दोनों के लिए लेना होता है। 

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Nagaland Arunachal Pradesh and Mizoram where indian people can not go without inner line permit
नगालैंड - फोटो : Social media

भारत में ही भारतीय नागरिकों के लिए बने इनर लाइन परमिट के इस नियम को ब्रिटिश सरकार ने बनाया था, जो अब तक लागू है। हालांकि समय-समय पर इसमें सुधार किया जाता रहा है। बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर विनियम, 1873 के तहत यह नियम एक सीमित अवधि के लिए किसी संरक्षित या प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति देता है। 

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Nagaland Arunachal Pradesh and Mizoram where indian people can not go without inner line permit
नगालैंड जनजाति - फोटो : Social media

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिटिश सरकार ने इनर लाइन परमिट का ये नियम अपने व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए बनाया था। वहीं कुछ लोग मानते हैं कि इस नियम को सीमावर्ती राज्यों की जनजाति और उनकी संस्कृति आदि की रक्षा के लिए बनाया गया था, ताकि बाहरी लोग इन जगहों पर आकर उनकी संस्कृति को प्रभावित न कर सकें। 

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