Science News: धरती पर नई-नई प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं। इन आपदाओं को लेकर वैज्ञानिक समय-समय पर चेतावनी भी देते रहते हैं। धरती पर पांच बार ऐसी तबाही आई है जिसने जीवन को खत्म कर दिया। ऐसी तबाही 25 करोड़ साल पहले धरती पर आई थी जिसकी वजह से पृथ्वी पर 90 फीसदी जीवन का पूरी तरह से खत्म हो गया था। इस घटना को एंड पर्मियन या ग्रेट डाइंग कहते हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस तबाही के बाद नाटकीय रूप से धरती पर फिर से जीवन की उत्पत्ति हुई। इस दौरान जानवरों ने जन्म लिया, लेकिन ये अपने पूर्वजों से भी अधिक तेज थे। एक नई स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। इंग्लैंड की ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में जीवाश्म वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह स्टडी की है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों ने इस नई-नई स्टडी में क्या-क्या जानकारियां मिली हैं।
2 of 5
प्रलय के बाद इस जीव का हुआ था जन्म
- फोटो : iStock
जीवाश्म वैज्ञानिको की एक टीम को स्टडी में पता चला है कि ग्रेट डाइंग की तबाही के बाद नए शिकारियों ने जन्म लिया। जन्म लेने वाला छिपकली और पक्षियों की प्रजाति के जीव बेहद तेज और स्मार्ट हो गए। इसके साथ ही इनके अंदर जानवरों से बचने की क्षमता भी विकसित हो गई।
3 of 5
प्रलय के बाद इस जीव का हुआ था जन्म
- फोटो : iStock
भूमि और पानी में मौजूद जानवर 20 से 25 करोड़ साल पहले बेहद ऊर्जावान थे। वह अपने शरीर की बनावट की वजह से तेज थे। नई स्टडी के प्रमुख लेखक प्रोफेसर माइकल बेनटन ने इन जानवरों के बारे में विस्तार से बताया है।
4 of 5
प्रलय के बाद इस जीव का हुआ था जन्म
- फोटो : iStock
प्रोफेसर माइकल बेनटन का कहना है कि कुछ बहुत तेज होता जा रहा था। उन्होंने कहा कि इस समय के पक्षियों और स्तनधारियों में बड़ा अंतर है जबकि सरीसृप की प्रजातियां भी अलग हैं। सरीसृप का खून ठंडा होता जिसका मतलब है कि उनकी शरीर से बहुत गर्मी निकलती है। इसके बाद वह भी वह बहुत फुर्तीले होते हैं। उनमें इतनी सहनशक्ति नहीं होती है कि वह ठंड में रह पाएं।
5 of 5
प्रलय के बाद इस जीव का हुआ था जन्म
- फोटो : iStock
इन जानवरों का विकास जमीन के साथ ही समुद्र में भी हुआ। डॉ. फेक्सियांग वू ने बताया कि मछली, केकड़ा, गैस्ट्रोपॉ्ड और स्टारफिश में शिकार करने की कई क्षमताएं विकसित हुईं। वह बेहद तेज और शक्तिशाली हो चुके थे। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि तबाही से पहले इनके पूर्वज बेहद कमजोर थे। इस रिसर्च के लिए जिन जीवाश्म का इस्तेमाल किया है वह चीन में थे। इस रिसर्च से शिकारियों की एक अनोखई शृंखला के बारे में जानकारी मिली है।