शहद एक ऐसा पदार्थ है, जिसे दुनियाभर में स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। औषधीय गुणों से भरपूर होने के कारण इसे आयुर्वेद में भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। शहद न सिर्फ खाने में ही स्वादिष्ट होता है बल्कि सेहत के लिए भी कई तरह से फायदेमंद होता है। विटामिन ए, बी, सी, कैल्शियम, आयरन और आयोडीन जैसे पोषक तत्वों से भरपूर शहद के सेवन से शरीर में ऊर्जा और स्फूर्ति आती है। कई तरह के रोगों से लड़ने के लिए शहद शक्ति देता है। शहद केवल मधुमक्खियां ही बना पाती हैं, जो सुनहरे रंग का होता है। लेकिन बहुत कम लोगों को यह बात पता है कि शहद नीले रंग का भी होता है।
बता दें कि नीले रंग का शहद भी मधुमक्खियां ही बनाती हैं। हालांकि, ये एक केवल संयोग मात्र था और मधुमक्खीपालकों ने पाया की उनकी मधुमक्खियां अचानक ही नीला शहद बनाने लगीं। इसकी पड़ताल करने पर उन्होंने जो देखा वह बहुत हैरान करने वाला था।
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नीले रंग की शहद वाली ये घटना फ्रांस की है। साल 2012 में उत्तरपूर्वी फ्रांस के रिबेयूविले कस्बे के मधुमक्खीपालकों ने पाया कि उनकी मधुमक्खियां अचानक ही रहस्यमय तरीके से अलग ही रंग का शहद बनाना शुरू कर दिया है।
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मधुमक्खीपालकों ने मधुमक्खियों के द्वारा नीले रंग का शहद बनाने के पीछे का वजह जानने की कोशिश में जुट गए और कुछ महीनों बाद उन्होंने इसका कारण खोज निकाला। उन्होंने पाया कि मधुमक्खियां कस्बे के पास स्थित बायोगैस संयंत्र के कचरे को खा रही हैं, जिससे वे यह खास रंग का शहद बना पा रही हैं। नीले रंग का शहद बेचने योग्य नहीं होता है।
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आपको बता दें कि फ्रांस से पहले अमेरिका के कैलीफोर्निया में भी मधुमक्खियों ने अचानक ही नीला शहद बनाना शुरू कर दिया था। उसकी पड़ताल में इतना ही पता चला कि मधुमक्खियां ऐसा पराग लाने लगी थीं, जिससे इसका रंग नीला हो जाता था।
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उल्लेखनीय है कि नीला शहद एक और तरीके से भी तैयार किया जाता है। इसके लिए साधारण शहद में मशरूम डाला जाता है, जिसके कुछ समय बाद शहद का रंग नीला-भूरा रंग ले लेता है। लेकिन शहद में मशरूम को दो महीने के आसपास के लंबे समय तक रखना पड़ता है।