फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

टीका उत्सव: वैक्सीन के शुरुआती ट्रायल से डरते थे लोग, कैदियों को इंजेक्शन देकर किया गया प्रयोग

Mon, 12 Apr 2021 06:01 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Mon, 12 Apr 2021 06:01 PM IST
विज्ञापन
intersting facts about coronavirus vaccine trial amid tika utsav
कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के खिलाफ जंग छेड़ते हुए देश में रविवार से टीका उत्सव की शुरुआत की गई। ये टीका उत्सव 14 अप्रैल तक चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से अपील की है कि इस खास मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोग टीका लगवाएं। हालांकि, टीकाकरण के शुरू होने के बाद भी बहुत से लोग कई तरह के डर के वजह से वैक्सीन लेने से झिझक रहे हैं। आप इसी बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि दुनिया में पहला टीका आने पर लोग कितना डरे हुए रहे होंगे।

intersting facts about coronavirus vaccine trial amid tika utsav
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

कोरोना वायरस के आने से पहले भी दुनिया में कई तरह की महामारियों का फैलने का जिक्र मिलता है। हैजा, चेचक, प्लेग, रेबीज, टीबी और पोलियो समेत कई बीमारियों के कारण लाखों-करोड़ों लोगों की जानें गईं। लेकिन विकसित मेडिकल व्यस्था नहीं होने के कारण लोगों को सही इलाज नहीं मिल पाता था। ऐसे में डॉक्टर अपने हिसाब से इलाज करते थे, जिसके कारण लोगों की जान चली जाती थी।

intersting facts about coronavirus vaccine trial amid tika utsav
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

मेडिकल साइंस की तरक्की होने से वैज्ञानिकों को ये बात समझ में आया कि किसी भी बीमारियों से बचने के लिए टीका काफी प्रभावी हो सकता है। ऐसा माना जाता है कि चेचक दुनिया की ऐसी पहली बीमारी थी जिसके टीके की खोज हुई। चेचक के टीके की खोज साल 1976 में अंग्रेज चिकित्सक एडवर्ड जेनर ने किया था। आज के समय में भले ही लोग चेचक रोग को सामान्य मानते हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब ये बीमारी काफी गंभीर थी। सत्तर के दशक में इस बीमारी का डर खत्म हुआ। चेचक के वजह से दुनियाभर में करीब 50 करोड़ लोगों की जान चली गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन
intersting facts about coronavirus vaccine trial amid tika utsav
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Twitter/ANI

टीका की खोज के बाद इसका ट्रायल करना काफी मुश्किल था। क्योंकि लोग टीका लेने और टीकाकरण के ट्रायल में शामिल होने से डरते थे। किसी भी वैक्सीन को बनाने और लैब टेस्ट में सफल होने के बाद ह्यूमन ट्रायल एक अहम पड़ाव होता है। लेकिन लोग तो ट्रायल में भाग लेना ही नहीं चाहते थे। ऐसे में वैज्ञानिकों ने ट्रायल के लिए एक अलग तरीका निकाला।

विज्ञापन
intersting facts about coronavirus vaccine trial amid tika utsav
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

कैदियों पर होते थे प्रयोग
वैज्ञानिकों ने टीके के ट्रायल के लिए डिटेंशन कैंपों में रहने वाले लोगों को जबरदस्ती हिस्सा बनाने लगे। कहीं गैस मास्क लगाकर फ्लू के वायरस डाले जाते, तो कहीं इंजेक्शन के जरिए बीमारियों के वायरस शरीर में डाल दिए जाते थे। यहां तक कि हेपेटाइटिस की बीमारी के मरीजों से रक्त लेकर उसे स्वस्थ कैदियों में डाल दिया गया और फिर उन पर प्रयोग हुआ। सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि प्रयोग के दौरान मरने वाले कैदियों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखा जाता था।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed