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Science News: क्या धरती पर खत्म होने वाला है जीवन? वैज्ञानिकों ने दुनिया को दी बड़ी चेतावनी

Sun, 17 Sep 2023 02:26 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Sun, 17 Sep 2023 02:26 PM IST
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earth well outside safe operating space for humanity scientists find
Scientist Earth Is Not A Safe Space For Humanity - फोटो : iStock

Science News: धरती पर जीवन का अस्तित्व अतीत बन जाना तय है, लेकिन सवाल है कि आखिर कब? जीवाश्मों के अध्ययन के मुताबिक, धरती पर जीवन के अस्तित्व को लगभग 3.5 अरब साल हो चुके हैं। इतने सालों में धरती ने कई तरह की आपदाओं का सामना किया है। अब वैज्ञानिकों ने भी धरती पर जीवन को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, धरती पर जिस सिस्टम की वजह से जीवन संभव है, वह बहुत अधिक क्षतिग्रस्त हो गया है।



वैज्ञानिका का कहना है कि इस सिस्टम को इतना अधिक नुकसान पहुंच चुका है कि अब धरती मानवता के लिए सुरक्षित जगह बनने से काफी बाहर हो चुकी है। वैज्ञानिकों की जांच में डराने वाला खुलासा हुआ है। जांत में पता चला है कि  प्रदूषण और प्राकृतिक दुनिया के विनाश की वजह से नौ में से छह ग्रहीय सीमाएं खत्म हो चुकी हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, दरअसल यह सीमाएं, जलवायु, जल और वन्यजीव में विविधता है। अब इनके क्षतिग्रस्त होने की वजह से एक स्वस्थ ग्रह को बनाए रखने की क्षमता के फेल होने का खतरा बढ़ चुका है। 
 

earth well outside safe operating space for humanity scientists find
Scientist Earth Is Not A Safe Space For Humanity - फोटो : iStock

सुरक्षित स्थिति से दूर हो चुका है सिस्टम

वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्रहों की टूटी सीमाओं का मतलब है कि सिस्टम एक सुरक्षित और स्थिर स्थिति से बेहद दूर हो चुका है। 10000 साल पहले आखिरी हिमयुग के अंत से लेकर औद्योगिक क्रांति की शुरुआत तक यह सिस्टम मौजूद था। इसी समय में संपूर्ण आधुनिक सभ्यता की शुरुआत हुई थी। इस समय को होलोसीन भी कहते हैं। वैज्ञानिकों ने बताया है कि छह सीमाएं टूट चुकी हैं और दो टूटने के कगार पहुंच चुकी हैं। यह दो हैं वायु प्रदूषण और महासागरों में एसिड का बढ़ना।

 

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Scientist Earth Is Not A Safe Space For Humanity - फोटो : iStock

सिकुड़ चुका है ओजोन का छेद

वायुमंडलीय ओजोन एक ऐसी सीमा है जिसे खतरा नहीं है। हाल के सालों में विनाशकारी रसायनों को एक फेज में खत्म करने का जो तरीका है, उसकी वजह से छेद सिकुड़ गया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि सबसे अधिक चिंता करने की बात यह है कि जीवित दुनिया में मौजूद सभी चार जैविक सीमाएं उच्चतम जोखिम स्तर पर या उसके करीब थीं। धरती के लिए जीवित दुनिया बेहद महत्वपूर्ण है। 

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Scientist Earth Is Not A Safe Space For Humanity - फोटो : iStock

ग्रहों की सीमाएं

वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्रहों की सीमाओं में बदलाव नहीं लाया जा सकता है, जिसके आगे अचानक और गंभीर गिरावट आए। यह सीमाएं ऐसे बिंदु हैं जिनके बाद धरती के भौतिक, जैविक और रासायनिक जीवन समर्थक प्रणालियों में परिवर्तन का खतरा बढ़ जाता है। 

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Scientist Earth Is Not A Safe Space For Humanity - फोटो : iStock

पहली बार साल 2009 में ग्रहों की सीमाओं को तैयार किया गया। इसके बाद साल 2015 में इन्हें अपनाया गया। उस समय वैज्ञानिकों ने सिर्फ सात ग्रहों की जांच की थी। वैज्ञानिकों के मुताबिक, विज्ञान और दुनियाभर में समाजों पर पड़ रही सभी चरम जलवायु घटनाएं चिंतित करने वाली हैं,लेकिन ग्रहों का घटता लचीलापन सबसे खतरनाक है। 

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