Delhi Election Counting: 5 फरवरी 2025 को दिल्ली विधानसभा का चुनाव हुआ था। दिल्ली की जनता ने इस दिन अपने मतों का प्रयोग करके अपने पसंदीदा उम्मीदवार को वोट दिया। आज यानी 8 फरवरी 2025 को नतीजे का दिन है। चुनाव परिणामों में बीजेपी बहुमत का आंकड़ा पार कर चुकी है और आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में अपनी सरकार बनाएगी। हालांकि, अभी भी वोटों की गिनती जारी है।
मगर क्या आपने कभी सोचा है कि वोटों की गिनती के बाद ईवीएम मशीनों को कहां रखा जाता है? अक्सर चुनाव के दौरान ईवीएम मशीन सुर्खियों में रहती हैं। कई बार ये भी देखा गया है कि गिनती के बाद चुनाव हारने वाली पार्टी ईवीएम के पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती है, मगर दिलचस्प बात यह है कि जो पार्टी चुनाव जीतती है वो ईवीएम के बारे में कुछ नहीं बोलती। हालांकि, चुनाव आयोग हमेशा ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर आश्वस्त करता रहा है।
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ईवीएम मशीनें
- फोटो : Freepik
अब वापस उस सवाल पर आते हैं कि वोटों की गिनती के बाद ईवीएम मशीनों को कहां रखा जाता है? दरअसल, बहुत से लोगों को लगता है कि गिनती के बाद तो ईवीएम मशीनें अगले चुनाव की तैयारियों में लग जाती हैं, मगर ऐसा नहीं है। वोटों की गिनती के बाद ईवीएम मशीनों को 45 दिनों तक सुरक्षित स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। अब बहुत से लोगों के दिमाग में होगा कि आखिर ऐसा क्यों किया जाता है? इसको समझने के लिए आपको ईवीएम से होने वाले मतदान की पूरी प्रक्रिया को समझना होगा। आइए समझते हैं।
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ईवीएम मशीनें
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सबसे पहले वोटिंग के दिन ईवीएम मशीनों को मतदान केंद्रों पर लगाया जाता है। शाम में मतदान समाप्त होने के बाद, इन मशीनों को सील करके स्थानीय स्ट्रांग रूम में ले जाया जाता है। स्ट्रांग रूम पुलिस की कड़ी सुरक्षा में रहता है और यहां हर कोने में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं। मतगणना के दिन यानी वोटों की गिनती के दिन, स्ट्रांग रूम से ईवीएम मशीनों को मतगणना केंद्र पर ले जाया जाता है। यहां पर इन मशीनों को खोला जाता है और वोटों की गिनती की जाती है।
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ईवीएम मशीनें
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कैसा होता है स्ट्रांग रूम?
स्ट्रांग रूम एक बहुत सुरक्षित स्थान होता है, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता है। स्ट्रांग रूम को इस तरह से तैयार किया जाता है कि वहां मौसम के तापमान का अधिक प्रभाव नहीं पड़ता है। वहां पर न तो गर्मी का असर होता है और न ही नमी का। बता दें कि स्ट्रांग रूम में ईवीएम मशीनों को सूटकेस में बंद करके रखा जाता है, जिससे वह पूरी तरह से सुरक्षित रहती हैं।
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ईवीएम मशीनें
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क्यों 45 दिनों तक सुरक्षित रखी जाती हैं EVM मशीनें?
वोटों की गिनती के बाद, ईवीएम मशीनों को वापस स्ट्रांग रूम में ले जाया जाता है और उन्हें 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके पीछे बड़ी वजह है कि अगर किसी उम्मीदवार को अपनी वोटों की गिनती पर संदेह होता है तो दोबारा काउंटिंग करवा सकता है। इसके लिए उम्मीदवार के पास 45 दिनों का समय होता है। 45 दिन गुजरने के बाद, इन मशीनों को निर्वाचन आयोग के गोदाम में भेज दिया जाता है।