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आखिर कैसे हुई थी महान आचार्य चाणक्य की मौत? 2300 साल से बना है रहस्य

Sat, 06 Jun 2020 11:03 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 06 Jun 2020 11:03 AM IST
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Death mystery of Acharya Chanakya also known as kautilya
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

प्राचीन भारत में ऐसे-ऐसे महान व्यक्ति पैदा हुए हैं, जो आज भी याद किए जाते हैं। ऐसे ही थे महान आचार्य चाणक्य, जो 'कौटिल्य' के नाम से भी विख्यात हैं। वह तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की है, जिनमें 'अर्थशास्त्र' सबसे प्रमुख है। अर्थशास्त्र को मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है। इसके अलावा भी उन्होंने कई ऐसे काम किए हैं, जिनकी बदौलत उन्हें हमेशा से याद किया जाता रहा है और शायद आगे भी याद किया जाता रहेगा। माना जाता है कि आचार्य चाणक्य का जन्म ईसा पूर्व 375 में हुआ था जबकि मृत्यु ईसा पूर्व 283 में हुई थी, लेकिन उनकी मौत कैसे हुई थी, यह आज भी एक रहस्य ही बनी हुई है। 

Death mystery of Acharya Chanakya also known as kautilya
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

चौथी शताब्दी में रचित संस्कृत के एतिहासिक नाटक मुद्राराक्षस के अनुसार चाणक्य का असली नाम विष्णुगुप्त था। माना जाता है कि यह नाम उन्होंने खुद रखा था और इसके पीछे एक कहानी प्रचलित है। कहते हैं कि मगध के राजा धनानंद द्वारा राजद्रोह के अपराध में चाणक्य के पिता चणक की हत्या करवा देने के बाद उन्होंने उनके सैनिकों से बचने के लिए अपना नाम बदलकर विष्णुगुप्त रख लिया था।  

Death mystery of Acharya Chanakya also known as kautilya
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

हालांकि बाद में चाणक्य ने अपने पिता की हत्या का बदला भी लिया और नंद वंश के राजा धनानंद को सत्ता से बेदखल कर उसकी जगह पर चंद्रगुप्त को मगथ का सम्राट बनाया। कौटिल्य यानी चाणक्य द्वारा नंद वंश का विनाश और मौर्य वंश की स्थापना से संबंधित कथा विष्णु पुराण में आती है। 

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Death mystery of Acharya Chanakya also known as kautilya
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

वैसे तो का चाणक्य का नाम, जन्मतिथि, जन्मस्थान और उनकी मृत्यु चारों ही विवाद के विषय रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा विवाद उनकी मृत्यु को लेकर है। उनकी मृत्यु के संदर्भ में कई कहानियां प्रचलित हैं, लेकिन कौन सी कहानी सच है, यह कोई नहीं जानता। पहली कहानी ये है कि एक दिन चाणक्य अपने रथ पर सवार होकर मगध से दूर किसी जंगल में चले गए और उसके बाद वो कभी लौटे ही नहीं। 

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Death mystery of Acharya Chanakya also known as kautilya
आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

चाणक्य की मृत्यु के संबंध एक कहानी जो सबसे ज्यादा प्रचलित है, वो ये है कि उन्हें मगथ की ही रानी हेलेना ने जहर देकर मार दिया गया था। एक और कहानी ये है कि राजा बिंदुसार के मंत्री सुबंधु ने आचार्य को जिंदा ही जला दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। हालांकि इनमें से कौन सी कहानी सच है, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है। 

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