Chandrayaan-3: भारत की अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) ने चांद पर इतिहास रच दिया है। भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला पहला देश बन गया गया है। इसके अलावा अमेरिका, चीन और रूस के बाद चांद की सतह पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। चंद्रयान-3 का लैंडर विक्रम लगातार चांद की तस्वीरें और वीडियो भेज रहा है, तो वहीं लेंडर से बाहर निकलने के बाद प्रज्ञान रोवर लगातार नई-नई जानकारियां दे रहा है।
Chandrayaan-3: सिर्फ इतने दिन काम करेगा रोवर प्रज्ञान! जानिए आखिर क्या है वजह, अभी तक की है ये खोज
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सिर्फ इतने दिन काम करेगा रोवर
चांद की सतह पर रोवर सिर्फ एक दिन (धरती के 14 दिन) काम कर सकेगा। रोवर प्रज्ञान में 6 व्हील, नेविगेशन कैमरा और 50W वाले सोलर पैनल लगाए गए हैं। Rx/Tx एंटीना के माध्यम से यह लैंडर से सीधा कनेक्ट करता है। कैमरा फोटो खींचकर विक्रम लैंडर को भेजते रहेगा।
लैंडिग के बाद विक्रम और प्रज्ञान सिर्फ 14 दिनों तक काम करेंगे। चांद पर 23 अगस्त को सूरज उदय हुआ था और 5-6 सितंबर को ढल जाएगा। अब यह दोनों सिर्फ एक हफ्ते तक काम कर सकेंगे। अभी तक चंद्रयान के लैंडर और रोवर सोलर पैनल के माध्यम से ऊर्जा जनरेट कर रहे हैं। लेकिन जब 14 दिन बाद वहां पर रात होगी, तब कठिन समय शुरू होगा।
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रात होने के बाद इनको ऊर्जा का स्त्रोत नहीं मिल सकेगा, तो पावर जनरेट होने की प्रक्रिया रुक जाएगी और ऊर्जा नहीं मिलेगी तो भयानक ठंड शायद यह झेल न सकें। इसकी वजह से इन दोनों की उम्र सिर्फ 14 दिन बताई जा रही है।
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अभी तक क्या-क्या मिली जानकारी
चंद्रयान-3 के विक्रम लैंडर ने चांद की सतह के तापमान की जानकारी दी है। इसरो ने लैंडर में एक खास तरह का थर्मामीटर भेजा है, जो सतह के ऊपर और सतह से 10 सेंटीमीटर नीचे का तापमान सिर्फ देखकर नाप सकता है। चांद की सतह पर तापमान 50 से 60 डिग्री सेल्सियस के बीच है, जबकि ठीक उसकी सतह के नीचे 10 सेंटीमीटर अंदर तापमान माइनस 10 डिग्री सेल्सियस है। इसके अलावा इसरो ने चंद्रयान-3 के भेजे कई फोटो और वीडियो को शेयर किया है।
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