साल 1972 में Gene cernan के बाद से कोई दूसरा एस्ट्रोनॉट चांद पर नहीं गया है। ऐसे में नासा दोबारा चांद पर मानव मिशन भेजने के लिए कमर कस चुका है। नासा की ऑफिशियल वेबसाइट की मानें तो वह 2025 में आर्टेमिस मिशन को चांद की सतह पर उतारने वाला है। इस मिशन के अंतर्गत पृथ्वी की सबसे पहली महिला को चांद पर उतारा जाएगा। इससे पहले साल 1969 से 1972 के बीच नासा ने कई अपोलो मिशन्स चांद पर भेजे थे। हालांकि इन सभी मिशन्स में केवल पुरुष ही शामिल थे, उनमें कोई महिला एस्ट्रोनॉट नहीं थी।
आर्टेमिस मिशन का मकसद चांद पर वैज्ञानिक खोजों को अंजाम देना है। नासा का ये मिशन आने वाली पीढ़ियों के लिए स्पेस एक्सप्लोरेशन के नए मार्ग खोलने वाला है। इस मिशन को लेकर नासा के साथ-साथ देश दुनिया की तमाम स्पेस एजेंसियां काफी उत्साहित दिख रही हैं। इसी कड़ी में आइए जानते हैं आर्टेमिस मिशन के मेगा प्लान केे बारे में -
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आर्टेमिस मिशन 2025
- फोटो : NASA
इस मिशन की खास बात ये है कि नासा के एस्ट्रोनॉट केवल चंद घंटे चांद की सतह पर बिता कर वापस नहीं आएंगे, बल्कि वे लंबे समय तक वहां पर लूनर बेस बना कर रहने वाले हैं। इस दौरान एस्ट्रोनॉट चांद की सतह का बारीकी से अध्ययन करेंगे। नासा का प्लान है कि वो चांद पर माइनिंग भी करेगा। आपको बता दें कि मून की सतह पर प्लेटिनम, सिलिकॉन, आयरन, टाइटेनियम, अमोनिया आदि जैसे कई बेशकीमती खनिज पदार्थ मौजूद हैं।
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आर्टेमिस मिशन 2025
- फोटो : Istock
हालांकि, उनकी माइनिंग करना इतना आसान काम नहीं होगा। चांद पर पृथ्वी के मुकाबले ग्रेविटी 6 गुना कमजोर है। ऐसे में एस्ट्रोनॉट को खनिज पदार्थों की माइनिंग करने के लिए विशेष प्रकार के उपकरणों को अपने साथ ले जाना होगा। इसे देखते हुए दूसरे देशों की स्पेस एजेंसियां भी चांद पर जाने के लिए अपने मिशन्स की योजना बना रही हैं। ऐसे में ये दशक स्पेस रेस के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण होने वाला है। कई विशेषज्ञों द्वारा संभावना जताई जा रही है कि दशक के अंत तक कई सुपर पावर देशों के बीच एक स्पेस वॉर भी शुरू हो सकती है।
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आर्टेमिस मिशन 2025
- फोटो : NASA
आर्टेमिस मिशन स्पेस एक्सप्लोरेशन के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत करने वाला है। इस मिशन को भेजने से पहले नासा दो और मिशन को चांद पर रवाना करेगा, जिनका काम मून लैंडिंग में उपयोग होने वाली जरूरी तकनीकों का टेस्ट करना है। इन दोनों की सफलतापूर्वक टेस्टिंग के बाद नासा की योजना आर्टेमिस मिशन के जरिए सफलतापूर्वक एस्ट्रोनॉट को सतह पर उतारना है। इसके पश्चात चांद की सतह पर लूनर बेस या लूनर विलेज को तैयार किया जाएगा।
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आर्टेमिस मिशन 2025
- फोटो : NASA
लूनर बेस को बनाने में बड़ी मात्रा में कार्गो की जरूरत चांद पर पड़ेगी। इस कारण आर्टेमिस मिशन भविष्य में काफी खर्चीला होगा। इसके खर्चे को कम करने के लिए नासा ने लूनर गेटवे का कॉन्सेप्ट सब के सामने रखा है। लूनर गेटवे एक तरह का स्पेस स्टेशन होगा, जो चंद्रमा को ऑर्बिट करेगा। चांद पर भेजे जाने वाले सभी लॉजिस्टिक को लूनर गेटवे के जरिए ही वहां पर उतारा जाएगा। ऐसे में ईंधन पर आने वाला खर्चा काफी कम हो जाएगा।