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दादी ने लगाए इतने पेड़ कि बन गया जंगल, बदल गई गांव की तस्वीर

Sat, 02 Nov 2019 07:09 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Sat, 02 Nov 2019 07:09 PM IST
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76 year old woman plants more than 500 trees in Uttarakhand
प्रभा देवी - फोटो : Social media

बच्चों के लिए दादियां किसी महानायक से कम नहीं होतीं, फिर चाहे वो उनकी अपनी दादी हों या क्षेत्र की कोई बुजुर्ग महिला, जिन्हें सभी प्यार से दादी अम्मा बुलाते हैं। दादियों के योगदान को किसी भी रूप में कमतर नहीं आंका जा सकता। नई और रोमांचक कहानियां सुनाने से लेकर स्वादिष्ट पकवान बनाने तक दादियां हर काम बखूबी करती हैं। आज भी हम आपको ऐसी ही एक महान दादी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अकेले 500 से भी अधिक पेड़ लगाकर इलाके की तस्वीर ही बदल दी।

76 year old woman plants more than 500 trees in Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

आज जहां दुनिया जलवायु परिवर्तन के कारण घोर संकट से जूझ रही है, वहीं उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के एक गांव में रहने वाली दादी प्रभादेवी ने 500 से भी अधिक पेड़ लगाकर एक नया जंगल ही उगा दिया और जलवायु परिवर्तन के घोर संकट से लड़ने में अहम योगदान दिया है। दादी प्रभादेवी शायद जलवायु परिवर्तन जैसे शब्द न जानती हों, लेकिन उन्हें इतना जरूर पता है कि अपनी प्रकृति को बचाना आज हर इंसान के लिए प्राथमिकता है। दादी को जब भी समय मिलता है, वो पेड़ लगाती हैं। उनका घर फल-फूल के पेड़ों से घिरा हुआ है।

76 year old woman plants more than 500 trees in Uttarakhand
प्रभा देवी - फोटो : Social media

दादी का एक 25 वर्षीय पोता भी है, जिसका नाम अतुल सोमवाल है। उनका कहना है कि वे बीते कुछ वर्षों से नौकरी के कारण दादी से दूर देहरादून में रहते हैं, लेकिन उनका बचपन गांव में ही दादी के साथ बीता है। अतुल के अनुसार, उन्होंने कभी भी अपनी दादी को खाली बैठे नहीं  देखा, वे हमेशा कुछ न कुछ करती रहती हैं और खुद को व्यस्त रखती हैं। दादी आज 76 वर्ष की आयु हो जाने के बावजूद सुबह पांच बजे उठ जाती हैं।

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76 year old woman plants more than 500 trees in Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दादी को जब भी पशुओं के लिए चारा लाना होता है तो वे घास को ऊपर से ही काटती हैं। उन्होंने आज तक कभी भी किसी पेड़ या पौधे को जड़ से नहीं उखाड़ा, क्योंकि इससे पेड़ मर जाते हैं। आस-पास के लोगों का मानना है कि दादी के हाथों में जादू है, क्योंकि उन्होंने आज तक जो भी बीज बोया है, वह पनपा जरूर है। दादी के द्वारा उगाए जंगल में हर तरह के क्षेत्रीय पेड़-पौधे हैं और वे उनका बहुत अच्छी तरह से ख्याल रखती हैं। 

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76 year old woman plants more than 500 trees in Uttarakhand
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

दादी की एक और खासियत यह है कि उनके पेड़-पौधों में लगने वाले तमाम फलों को वे बाजार में नहीं बेचतीं बल्कि आस-पास के क्षेत्र के लोगों को बांट देती हैं। उनके घर के बाहर लगे फलों के पेड़ पर उगने वाले फल उन स्कूली बच्चों के लिए हैं, जो उस रास्ते से गुजरते हैं। दादी के लिए जंगल ही उनकी जिंदगी है और इस बात का सबूत यह है कि दादी के बच्चे नौकरी के कारण घर से दूर रहते हैं और उन्होंने कई बार दादी को अपने साथ ले जाने की मंशा जताई है, लेकिन दादी ने हर बार इस बात से इनकार कर दिया।

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