फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

21 ग्राम होता है इंसान की आत्मा का वजन! इस वैज्ञानिक ने किया था प्रयोग

Thu, 27 Aug 2020 10:04 PM IST
नवनीत राठौर फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नवनीत राठौर Updated Thu, 27 Aug 2020 10:04 PM IST
विज्ञापन
21 grams weight of a human soul this scientist did the experiment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

प्राचीन मिस्र के लोगों का मानना था कि मरने के बाद इंसान एक लंबे सफर पर निकल पड़ता है। ये सफर बेहद मुश्किल होता है जिसमें वो सूर्य देवता (जिन्हें मिस्र के लोग रा कहते हैं) की नाव पर सवार होकर 'हॉल ऑफ डबल ट्रूथ' तक पहुंचता है। किंवदंतियों के मुताबिक, सच्चाई का पता लगाने वाले इस हॉल में आत्मा का लेखा-जोखा देखा जाता है और उसका फैसला होता है। यहां सच और न्याय की देवी की कलम के वजन की तुलना इंसान के दिल के वजन से की जाती है।



प्राचीन मिस्र के लोगों का मानना था कि इंसान के सभी भले और बुरे कर्मों का हिसाब उसके दिल पर लिखा जाता है। अगर इंसान ने सादा और निष्कपट जीवन बिताया है तो उसकी आत्मा का वजन पंख की तरह कम होगा और उसे ओसिरिस के स्वर्ग में हमेशा के लिए जगह मिल जाएगी।

21 grams weight of a human soul this scientist did the experiment
ओसिरिस और उनकी पत्नी आइसिस - फोटो : सोशल मीडिया

मिस्र की इस प्राचीन मान्यता की एक झलक 1907 में 'जर्नल ऑफ द अमरीकन सोसाइटी फॉर साइकिक रीसर्च' में छपे एक शोध में मिली। 'हाइपोथेसिस ऑन द सबस्टेन्स ऑफ द सोल अलॉन्ग विद एक्सपेरिमेन्टल एविडेन्स फॉर द एग्जिस्टेंस ऑफ सैड सब्जेक्ट' नाम के इस शोध में इंसान के मरने के बाद उसकी आत्मा से जुड़े प्रयोग पर चर्चा की गई थी।

21 grams weight of a human soul this scientist did the experiment
फेयरबैंक्स का तराजू - फोटो : सोशल मीडिया

आत्मा का वजन
इस शोध से जुड़ा एक लेख न्यूयॉर्क टाइम्स में मार्च 1907 में छपा जिसमें स्पष्ट तौर पर लिखा गया था कि डॉक्टरों को लगता है कि आत्मा का भी निश्चित वजन होता है। इसमें डॉक्टर डंकन मैकडॉगल नाम के एक फिजिशियन के प्रयोग के बारे में चर्चा थी।

1866 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जन्मे डॉक्टर डंकन बीस साल की उम्र में अमरीका के मैसाच्यूसेट आ गए थे। उन्होंने ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन से अपनी पढ़ाई पूरी की थी और अपने जीवन का अधिकतर वक्त हेवरिल शहर के एक चैरिटेबल हॉस्पिटल में लोगों का इलाज करते हुए बिताया। उस अस्पताल के मालिक एक ऐसे कारोबारी थे जिनका व्यापार मुख्य रूप से चीन के साथ था। वो चीन से जो चीजें लाए थे, उनमें से एक महत्वपूर्ण चीज थी फेयरबैंक्स का एक तराजू। ये तराजू सबसे पहले 1830 में बनाया गया था और इसमें बड़ी चीजों का सटीक माप आसानी से लिया जा सकता था।

विज्ञापन
विज्ञापन
21 grams weight of a human soul this scientist did the experiment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

डॉक्टर डंकन जहां काम करते थे, वहां आए दिन वो लोगों की मौत देखते थे। अस्पताल में वजन मापने की मशीन देखकर उनके दिमाग में इंसान की आत्मा का वजन मापने का खयाल आया। न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे लेख के अनुसार इस घटना के छह साल बाद शोध का विषय लोगों के सामने आया। ये था- "ये जानना कि इंसान के मरने के बाद जब उसकी आत्मा शरीर से अलग हो जाती है तो शरीर में उस कारण क्या बदलाव होता है?"

उनके शोध के विषय का नाता प्राचीन मिस्र के लोगों की मान्यता को साबित करना या फिर मिस्र के देवी-देवताओं के बारे में कुछ जानना कतई नहीं था लेकिन विषयवस्तु जरूर उसी प्राचीन मान्यता से मेल खाती थी। आप समझ सकते हैं कि उन्होंने अपने शोध की शुरुआत ही इस बात से की कि मरने के बाद इंसान के शरीर से आत्मा अलग होती है। यानी वो आत्मा के होने या न होने पर कोई सवाल नहीं कर रहे थे। लेकिन उनके शोध के नतीजे में कहीं न कहीं इस बात को विज्ञान के स्तर पर मान्यता देने की संभावना जरूर थी।

विज्ञापन
21 grams weight of a human soul this scientist did the experiment
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

डॉक्टर डंकन मैकडॉगल का प्रयोग
डॉक्टर डंकन मैकडॉगल ने एक बेहद हल्के वजन वाले फ्रेम का एक खास तरीके का बिस्तर बनाया जिसे उन्होंने अस्पताल में मौजूद उस बड़े तराजू पर फिट किया। उन्होंने तराजू को इस तरह से बैलेंस किया कि वजन में औंस (एक औंस करीब 28 ग्राम के बराबर होता है) से भी कम बदलाव को मापा जा सके। जो लोग गंभीर रूप से बीमार होते थे या जिनके बचने की कोई उम्मीद नहीं होती थी, उन्हें इस खास बिस्तर पर लिटाया जाता था और उनके मरने की प्रक्रिया को करीब से देखा जाता था।

शरीर के वजन में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को वो अपने नोट्स में लिखते रहते। इस दौरान वो ये मानते हुए वजन का हिसाब भी करते रहते कि मरने पर शरीर में पानी, खून, पसीने, मल-मूत्र या ऑक्सीजन, नाइट्रोजन के स्तर में भी बदलाव होंगे। उनके इस शोध में उनके साथ चार और फिजिशियन काम कर रहे थे और सभी इस आंकड़ों का अलग-अलग हिसाब रख रहे थे।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Bizarre News in Hindi related to Weird News - Bizarre, Strange Stories, Odd and funny stories in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Bizarre and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed