सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के शहीद सब इंस्पेक्टर मो. इम्तियाज का पार्थिव शरीर सोमवार को उनके गृह स्थल सारण जिले के गरखा प्रखंड के जलाल बसंत पंचायत के नारायणपुर गांव पहुंचा। हालांकि शव आने पहले ही स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के लोगों के अलावा जिले के आलाधिकारियों का हुजूम उमड़ पड़ा था। गौरतलब है कि जवान मो. इम्तियाज ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पंजाब के पठान कोट स्थित आरएस पुरा में पाकिस्तानी सीमा पर सीजफायर के बाद शहीद हुए थे।
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डीएम तथा अन्य अधिकारियों ने शहीद जवान को अर्पित की श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक, सारण के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) नीलेश कुमार, जिलाधिकारी अमन समीर और पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष सहित कई अन्य गणमान्य लोगों ने अमर शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर सच्ची श्रद्धांजलि दी। इसके साथ ही उन्होंने शहीद के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना प्रकट कर उन्हें धैर्य धारण की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से कामना की।
शहीद मो. इम्तियाज के भाई बीएसएफ जवान मो. मुस्तफा सहित परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा जिला प्रशासन की टीम से शहीद के नाम पर अस्पताल खोलने, स्कूल का नामकरण, स्मारक निर्माण और उनकी पत्नी के नाम से पेट्रोल पंप की मांग की गई है। इस संबंध में सारण के जिलाधिकारी अमन समीर ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अनुदान शीघ्र ही परिवार को दिया जाएगा, वहीं परिजनों की मांग को सरकार के समक्ष रखा जाएगा।
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डीएम तथा अन्य अधिकारियों ने शहीद जवान के परिजनों से की मुलाकात
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शहीद मो. इम्तियाज सारण जिले के गड़खा थाना क्षेत्र के बसंत जलाल पंचायत के नारायणपुर गांव के रहने वाले थे। वे जम्मू के आरएस पुरा में टीम का नेतृत्व करते हुए क्रॉस फायरिंग में शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचने की सूचना पर हजारों की संख्या में ग्रामीणों के अलावा आसपास गांव के महिला-पुरुष उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। पाकिस्तान की इस कायराना हरकत को लेकर शहीद जवान के भाई ने कहा कि पाकिस्तान को नक्शे से मिटा देना चाहिए, क्योंकि जब देश सुरक्षित होगा तभी तो गांव को सुरक्षित रखा जा सकता है।