Bihar: अखिल भारतीय असैनिक सेवा संगीत, नृत्य, लघु नाट्य प्रतियोगिता का 5वां दिन; गीत-संगीत से सराबोर हुए दर्शक
Patna News: पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित अखिल भारतीय असैनिक सेवा संगीत, नृत्य और लघु नाट्य प्रतियोगिता 24-25 के 5वें दिन कर्नाटक और पाश्चात्य संगीत की प्रतियोगिताओं ने दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दिन कुल चार प्रमुख विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।
सुरों की माधुर्यता ने जीता दिल
प्रतियोगिता की पहली विधा 'कर्नाटक क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल' थी, जिसमें कुल सात प्रतिभागियों ने भाग लिया। हर प्रतिभागी को 10 मिनट का समय दिया गया था, जिसमें उन्हें अपनी प्रस्तुति पूरी करनी थी। सुरों की मधुरता और वाद्ययंत्रों की गूंज से मंच संगीतमय हो उठा। इस श्रेणी में कर्नाटक सचिवालय के प्रतिभागी कार्तिक भारद्वाज ने शानदार प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
सुरों की कोमलता ने बिखेरा जादू
प्रतियोगिता की दूसरी विधा 'कर्नाटक लाइट क्लासिकल इंस्ट्रूमेंटल' थी, जिसमें कुल पांच प्रतिभागी शामिल हुए। इस विधा में हर प्रतिभागी को पांच मिनट का समय दिया गया था। हर प्रस्तुति एक से बढ़कर एक थी और दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की सौम्यता और कोमलता का अनुभव हुआ। इस प्रतियोगिता में भी कर्नाटक सचिवालय के प्रतिभागी राघवेंद्र प्रसाद ने बेहतरीन प्रदर्शन कर प्रथम स्थान हासिल किया।
पश्चिमी धुनों की सजीव प्रस्तुति
तीसरी विधा 'वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंटल' थी, जिसमें कुल नौ प्रतिभागियों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इस विधा में भी हर प्रतिभागी को पांच मिनट का समय दिया गया था। मंच पर गिटार, कीबोर्ड, ड्रम्स और अन्य पाश्चात्य वाद्ययंत्रों की धुनों ने समां बांध दिया। संगीत प्रेमियों के लिए यह एक अनूठा अनुभव था। इस श्रेणी में छत्तीसगढ़ सचिवालय के भीखमचंद निर्मलकर ने बेहतरीन प्रस्तुति देकर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
वेस्टर्न वोकल: सुरीली आवाजों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध
चौथी और अंतिम विधा 'वेस्टर्न वोकल' थी, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए नौ प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में दिल्ली की मोनिका मनचंदा ने अपनी मधुर आवाज और बेहतरीन गायन प्रतिभा से सभी को प्रभावित किया और प्रथम स्थान हासिल किया।
बिहार बना विविध संस्कृतियों का संगम
इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि देश के अलग-अलग राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने क्षेत्र की संस्कृति, वेशभूषा और संगीत को प्रस्तुत कर बिहार को विविधता का संगम बना दिया। जब कलाकार मंच पर अपनी पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुत हुए तो ऐसा लगा मानो पटना नहीं, बल्कि पूरे भारत की झलक देखने को मिल रही हो। दर्शकों ने हर प्रस्तुति को खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट ने यह साबित कर दिया कि यह आयोजन पूरी तरह से सफल रहा। बिहार की धरती पर संगीत, नृत्य और नाट्य का यह भव्य आयोजन भारतीय संस्कृति और कला के उत्थान में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।