विगत तीन दिनों से हो रही लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बेतिया जिले के मैनाटांड़ प्रखंड सहित नेपाल के अधिग्रहण क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। इस झमाझम बारिश के कारण पहाड़ी नदियां ओरिया, दोरहम, नौखनिया, गंगासागर और बिरहा के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है।
दरअसल, मैनाटांड़ प्रखंड में बारिश थमने का नाम नहीं ले रही है, जिससे ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बिरंची तीन के पास बहने वाली दोरहम नदी का पानी इलाके में दबाव बना रहा है। दोरहम का उग्र रूप देखकर बिरंची तीन गांव के लोग सहमे हुए हैं। उधर, ओरिया नदी का पानी भंगहा गदियानी गांव तक पहुंच चुका है। गदियानी उर्दू विद्यालय के पास से पानी का तेज बहाव हो रहा है।
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नदियों के बढ़े जलस्तर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है
- फोटो : अमर उजाला
विद्यालयों में भी असर
ओरिया नदी का पानी टोला चपरिया के उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय में घुस गया, जिससे वहां शनिवार को पठन-पाठन बंद करना पड़ा। वहीं, इनरवा बाजार और इसके आसपास के गांव भी ओरिया नदी के पानी की चपेट में आ गए हैं। हाईवे के पास से बहता पानी लोगों के लिए भय का कारण बन गया है। इनरवा बाजार में भी पूरब की ओर ओरिया का पानी प्रवेश कर चुका है।
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नदियों के बढ़े जलस्तर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है
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ग्रामीणों ने जताई चिंता
स्थानीय मुखिया प्रतिनिधि राजेश भगत और ग्रामीणों, जैसे नबी रसूल अंसारी, शमशाद आलम, भंटू अंसारी, शेर साहब मियां आदि ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि हर साल ओरिया नदी के जलस्तर के निरीक्षण के बावजूद भंगहा से इनरवा तक तटबंध बनाने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल ओरिया नदी के कारण नुकसान होता है, लेकिन प्रशासन तटबंध का निर्माण कराने में उदासीन रहा है।
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नदियों के बढ़े जलस्तर ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है
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प्रशासन की क्या है तैयारी
सीओ आशीष आनंद ने बताया कि अंचल प्रशासन द्वारा पहाड़ी नदियों के जलस्तर पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क और जागरूक रहने की सलाह दी है। सभी राजस्व कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने हल्के में बहने वाली नदियों के जलस्तर पर निगरानी रखें और आवश्यक सूचना उच्चाधिकारियों को देते रहें।
आम जनजीवन हो रहा प्रभावित
लगातार बारिश ने आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। सड़कों पर आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है। बारिश से प्रभावित इलाकों में लोगों के घरों में पानी घुसने की भी आशंका बढ़ गई है। पहाड़ी नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के चलते प्रशासनिक सतर्कता और बचाव के उपायों को और सख्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है।