गंगा में आए उफान से बिहार में आई बाढ़ में अब तक आठ लोगों की मौत हो चुकी है। देश के चार राज्य बुरी तरह बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। हज़ारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है, गंगा नदी में आए उफान से बिहार और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में हालात ख़राब है। पश्चिम बंगाल में भी गंगा का जल स्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। राजस्थान में भी भारी बारिश की वजह से बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। बिहार की तीन नदियां गंगा, सोन और पुनपुन
बाढ़ से बिगड़े हालात, छतों पर जलानी पड़ रही चिताएं
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पटना से स्थानीय पत्रकार नीरज सहाय ने बताया कि गंगा के जल स्तर में लगातार बढ़ोत्तरी से पटना के शहरी इलाके के सभी घाट लगभग डूब गए है। इसकी वजह से दियरा के लोगों ने अपनी मवेशियों के साथ ज़िले में चलाए जा रहे तीस राहत शिविरों में शरण लिया है। उन्होंने बताया कि बचाव कार्यों के लिए राज्य में 13 एनडीआरएफ और 12 एसडीआरएफ की बटालियन को तैनात किया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को राज्य में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा बैठक की और आशंका जताई कि सोमवार को गंगा के जल स्तर में और बढ़ोत्तरी हो सकती है।
उत्तर प्रदेश से स्थानीय पत्रकार समीरात्मज मिश्र ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा और यमुना ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। बारिश और नदियों का जलस्तर बढ़ने से इलाहाबाद और वाराणसी के कई निचले हिस्से जलमग्न हो गए हैं, वाराणसी में गंगा किनारे के कई घाटों की सीढ़ियां डूब गई हैं। उन्होंने बताया कि स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि मृतकों के दाह संस्कार के लिए भी खाली ज़मीन नहीं मिल रही है, जिस वजह से लोगों को घरों की छतों पर चिता जलानी पड़ रही है। बीस हज़ार परिवार राहत शिविर में रहने को मजबूर है।
इलाहाबाद के ज़िलाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि सेना को भी अलर्ट पर रखा गया है हालांकि अभी ऐसी स्थिति नहीं आई है कि उसे तैनात किया जाए। उत्तर प्रदेश में राहत कार्यों में लगे एनडीआरएफ के कमांडेंट कौश्लेंद्र राय ने बीबीसी को बताया, "उत्तर प्रदेश में बाढ़ के हालात गाजीपुर, बलिया और मिर्जापुर में बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश में एनडीआरएफ की सोलह टीमें तैनात की गई हैं।"
वहीं मध्यप्रेदश से स्थानीय पत्रकार शूरैह नियाज़ी ने बताया है कि सूबे में बाढ़ से प्रभावित विंध्यांचल क्षेत्र के दौरे पर गए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को स्थानीय लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा है। उन्होंने बताया कि राज्य के रीवा ज़िले में 35 जगहें ऐसी हैं जहां पहुंच पाना नामुमकिन है। वहां अभी भी राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। रीवा ज़िले के जिलाधिकारी राहुल जैन ने बताया है कि सात से आठ हज़ार लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं।