भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) क्रांति के हौसले बुलंद हो गए हैं। इसकी वजह से वह रिपोर्ट है कि राजस्थान में लिथियम के भंडार की एक बड़ी मात्रा की खोज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक यहां के भंडार से अकेले देश की 80 प्रतिशत मांग को पूरा किया जा सकते हैं। इस समय, भारत इस महत्वपूर्ण धातु की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन पर निर्भर है जो उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक सामानों के साथ-साथ ईवी बैटरी के निर्माण में एक प्रमुख कंपोनेंट है।
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रियासी में लीथियम का भंडार
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खबरों के मुताबिक देश में सबसे हालिया लिथियम की खोज राजस्थान के डेगाना में हुई है और यहां की गुणवत्ता इस साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर में खोजे गए लिथियम से भी बेहतर है। यह देश के भीतर ईवी उत्पादन में तेजी लाने और साथ ही - अप्रत्यक्ष रूप से - मोबिलिटी सॉल्यूशंस के लिए विदेशी बाजारों से आयातित तेल पर निर्भरता को कम करने की व्यापक क्षमता रखता है।
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इलेक्ट्रिक कार का भविष्य उज्जवल है।
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इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बैटरी टेक्नोलॉजी को काफी तेज रफ्तार से अपडेट किया जा रहा है। इस समय हर बैटरी पैक के लिए लगभग आठ किलो लिथियम की जरूरत होती है। पीटीआई की एक रिपोर्ट में पहले जिक्र किया गया था कि इस अनुमान से, भारत का आर्थिक रूप से निकालने योग्य लिथियम भंडार 184.4 मिलियन इलेक्ट्रिक कारों को बिजली देने के लिए पर्याप्त होना चाहिए।
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EV Battery
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भारत सरकार साल 2030 तक EV को 300 तक बढ़ाने की स्कीम पर काम कर रही है। इस स्कीम में लिथियम पर बहुत ज्यादा निर्भरता रहने वाली है। क्योंकि सारे इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी से ही संचालित होते हैं। यह रिचार्जेबल बैटरी लिथियम से ही बनाई जाती है। देश में लिथियम के भंडारों से जब माइनिंग शुरू हो जाएगी, तो प्रचुर मात्रा में सस्ता लिथियम भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा। क्योंकि बैटरी की लागत कम हो जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहन में बॉडी और मोटर के बाद बैटरी की कीमत ही सबसे ज्यादा होती है।
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राजस्थान में खोज के साथ यह आंकड़ा और भी ऊपर जा सकता है। और ऐसे समय में जब भारत ने 2018-2021 के बीच लिथियम के आयात पर लगभग 26,000 करोड़ रुपये खर्च किए, स्थानीय रूप से निकाले जाने वाले लिथियम हुकूम का इक्का साबित हो सकता है।