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EV: भारत सरकार टेस्ला और अन्य ईवी निर्माताओं को आकर्षित करने की बना रही योजना, ईवी नीति में कर सकती है बदलाव
Mon, 11 Nov 2024 10:18 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Mon, 11 Nov 2024 10:18 PM IST
सार
भारत सरकार कम आयात शुल्क पर प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के आयात में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए एक वर्कशॉप (कार्यशाला) आयोजित करने की योजना बना रही है। इसके जरिए सरकार अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) आयात योजना में फिर से दिलचस्पी पैदा करने की कोशिश कर रही है।
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Electric Car
- फोटो : Freepik
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भारत सरकार कम आयात शुल्क पर प्रीमियम इलेक्ट्रिक कारों के आयात में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए एक वर्कशॉप (कार्यशाला) आयोजित करके अपनी इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) आयात योजना में फिर से दिलचस्पी पैदा करने की कोशिश कर रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहल का मकसद फीडबैक जमा करना और योजना में सीमित रुचि के पीछे के कारणों को समझना है। इस योजना को शुरू में बड़ी उम्मीदों के साथ लॉन्च किया गया था।
Tesla Model 3
- फोटो : Tesla
टेस्ला ने जताई थी दिलचस्पी
पिछले साल, भारत ने आयात शुल्क में कमी करके उच्च-स्तरीय इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना शुरू की थी। इस कदम का उद्देश्य प्रमुख ईवी निर्माताओं, खास तौर पर टेस्ला को आकर्षित करना था। जिसने पहले आयात शुल्क कम होने पर भारतीय बाजार में एंट्री करने में दिलचस्पी जताई थी। हालांकि, इस योजना को लेकर मिली प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक उत्साहजनक नहीं रही है। जिसके कारण सरकार को एक बार फिर हितधारकों के साथ बातचीत करनी पड़ी।
पिछले साल, भारत ने आयात शुल्क में कमी करके उच्च-स्तरीय इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात और स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना शुरू की थी। इस कदम का उद्देश्य प्रमुख ईवी निर्माताओं, खास तौर पर टेस्ला को आकर्षित करना था। जिसने पहले आयात शुल्क कम होने पर भारतीय बाजार में एंट्री करने में दिलचस्पी जताई थी। हालांकि, इस योजना को लेकर मिली प्रतिक्रिया उम्मीद के मुताबिक उत्साहजनक नहीं रही है। जिसके कारण सरकार को एक बार फिर हितधारकों के साथ बातचीत करनी पड़ी।
Electric Car
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क्या है मकसद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस महीने के आखिर में इस योजना में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए एक कार्यशाला आयोजित करने की योजना बना रही है। यह कार्यशाला कंपनियों को योजना को बेहतर ढंग से समझने और फीडबैक देने के लिए एक मंच प्रदान करेगी, जो अंतिम नियमों को प्रभावित कर सकती है। यह परामर्श का दूसरा दौर होगा। पहला अप्रैल 2024 में आयोजित किया गया था और इसमें टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं। भारत में टेस्ला के प्रतिनिधि, द एशिया ग्रुप ने भी उस बैठक में भाग लिया था। इन कोशिशों के बावजूद, सिर्फ कुछ कंपनियों ने ही इस योजना में भाग लेने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार इस महीने के आखिर में इस योजना में रुचि रखने वाली कंपनियों के लिए एक कार्यशाला आयोजित करने की योजना बना रही है। यह कार्यशाला कंपनियों को योजना को बेहतर ढंग से समझने और फीडबैक देने के लिए एक मंच प्रदान करेगी, जो अंतिम नियमों को प्रभावित कर सकती है। यह परामर्श का दूसरा दौर होगा। पहला अप्रैल 2024 में आयोजित किया गया था और इसमें टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी, ह्यूंदै, बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं। भारत में टेस्ला के प्रतिनिधि, द एशिया ग्रुप ने भी उस बैठक में भाग लिया था। इन कोशिशों के बावजूद, सिर्फ कुछ कंपनियों ने ही इस योजना में भाग लेने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
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हाल में ही पेश हुई थी ईवी नीति
भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (SPMEPCI) कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत कम टैरिफ के साथ इलेक्ट्रिक कारों का आयात करने की अनुमति देती है। कंपनियों को पांच साल में कम से कम 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,150 करोड़ रुपये) का निवेश करना होगा। या तो ईवी फैक्ट्रियां बनाकर या ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करके। फर्मों को तीन साल के भीतर कम से कम 25 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) हासिल करना होगा और इसे पांच साल में बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना होगा।
स्वीकृत कंपनियां सामान्य उच्च दर की तुलना में 35,000 डॉलर और उससे ज्यादा कीमत वाले वाहनों पर कम 15 प्रतिशत सीमा शुल्क पर इलेक्ट्रिक कारों का आयात कर सकती हैं। इसके अलावा, कंपनियां इस कम दर पर सालाना 8,000 इलेक्ट्रिक कारों का आयात कर सकती हैं। जिसमें अप्रयुक्त आयात भत्ते अगले वर्ष के लिए ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
भारत में इलेक्ट्रिक पैसेंजर कारों के मैन्युफेक्चरिंग को बढ़ावा देने की योजना (SPMEPCI) कंपनियों को कुछ शर्तों के तहत कम टैरिफ के साथ इलेक्ट्रिक कारों का आयात करने की अनुमति देती है। कंपनियों को पांच साल में कम से कम 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,150 करोड़ रुपये) का निवेश करना होगा। या तो ईवी फैक्ट्रियां बनाकर या ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करके। फर्मों को तीन साल के भीतर कम से कम 25 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) हासिल करना होगा और इसे पांच साल में बढ़ाकर 50 प्रतिशत करना होगा।
स्वीकृत कंपनियां सामान्य उच्च दर की तुलना में 35,000 डॉलर और उससे ज्यादा कीमत वाले वाहनों पर कम 15 प्रतिशत सीमा शुल्क पर इलेक्ट्रिक कारों का आयात कर सकती हैं। इसके अलावा, कंपनियां इस कम दर पर सालाना 8,000 इलेक्ट्रिक कारों का आयात कर सकती हैं। जिसमें अप्रयुक्त आयात भत्ते अगले वर्ष के लिए ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
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ईवी स्कीम पर है सबकी नजर
इन प्रोत्साहनों के बावजूद, कुछ कंपनियों ने उच्च निवेश और स्थानीयकरण जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। सरकार को उम्मीद है कि आगे के परामर्श से यह साफ हो जाएगा कि कंपनियों को अधिक प्रोत्साहन की जरूरत है या नीति में एडजस्टमेंट से भागीदारी बढ़ सकती है। टेस्ला और विनफास्ट जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा योजना के विकास पर नजर रखने के साथ, सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले वर्षों में भारत के ईवी परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।
इन प्रोत्साहनों के बावजूद, कुछ कंपनियों ने उच्च निवेश और स्थानीयकरण जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। सरकार को उम्मीद है कि आगे के परामर्श से यह साफ हो जाएगा कि कंपनियों को अधिक प्रोत्साहन की जरूरत है या नीति में एडजस्टमेंट से भागीदारी बढ़ सकती है। टेस्ला और विनफास्ट जैसी प्रमुख कंपनियों द्वारा योजना के विकास पर नजर रखने के साथ, सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले वर्षों में भारत के ईवी परिदृश्य को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकती है।