अक्सर आपने यह सुना होगा कि उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर नहीं सोना चाहिए। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि ऐसा क्यों बोला जाता होता है? आखिर इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है। तो चलिए जानते हैं इसके बारे में..
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pexels.com
हमारा दिल शरीर के निचले हिस्से में नहीं है। वह शरीर से तीन-चौथाई ऊपर की ओर मौजूद है। जो रक्त शिराएं ऊपर की ओर जाती हैं, वे नीचे की ओर जाने वाली धमनियों के मुकाबले बहुत संवेदनशील और सूक्ष्म हैं। मस्तिष्क की ओर जाते समय ये इतनी पतली हो जाती हैं कि एक कण भी फालतू नहीं ले सकतीं। एक बूंद फालतू गई, तो हैमरेज हो सकता है। जब शरीर क्षैतिज अवस्था में होता है, तो नाड़ी की गति धीमी हो जाती है।
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अगर रक्त उसी स्तर पर पंप किया जाएगा, तो सिर में जरूरत से ज्यादा रक्त जा सकता है और नुकसान हो सकता है। अगर सिर उत्तर की ओर रखते हैं और पांच-छह घंटे तक उसी दशा में रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव आपके दिमाग पर दबाव डालेगा। इसलिए कहा जाता है कि उत्तर दिशा में सिर रखकर नहीं सोना चाहिए।
आपने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्रों (मैग्नेटिक फील्ड) के बारे में सुना होगा। पृथ्वी पर चुंबकीय शक्तियां प्रभावी हैं। अगर उत्तर की ओर सिर करते और पूरी नींद भर उसी तरह रहते हैं, तो चुंबकीय खिंचाव दिमाग पर दबाव डालेगा।
अगर शरीर मजबूत है और ये चीजें आपके साथ नहीं होतीं, तो आप उत्तेजित या परेशान होकर जाग सकते हैं, क्योंकि सोते समय दिमाग में जितना रक्त संचार होना चाहिए, उससे ज्यादा होता है। ऐसा नहीं है कि एक दिन ऐसा करने पर आप मर जाएंगे, मगर रोजाना ऐसा करने पर आप परेशानियों को दावत दे रहे हैं। किस तरह की परेशानियां हो सकती हैं, यह इस पर निर्भर है कि शरीर कितना मजबूत है।