Kundali Dosh Remedies- किसी भी व्यक्ति के जन्म समय, तिथि, नाम आदि के आधार पर कुंडली का निर्माण किया जाता है। ज्योतिष में इन्हीं ग्रह और नक्षत्रों की गणना के आधार पर कुंडली का आकलन किया जाता है। कुंडली में ग्रहों की युति और स्थिति के अनुसार शुभ और अशुभ योग बताए जाते हैं। कुंडली में मौजूद गुण और दोष का व्यक्ति के जीवन पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। जब किसी की कुंडली में कोई ग्रह अशुभ ग्रह के साथ संयोजन करता है तो कुंडली में दोष का निर्माण होता है। कुंडली में ऐसे पांच दोषों के बारे में बताया गया है, जो बेहद ही खतरनाक माने जाते हैं। इन दोषों को कारण जातक को अपने जीवन में कष्टकारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये दोष व्यक्ति के निजी जीवन, आर्थिक स्थिति और कार्यक्षेत्र तक पर प्रभाव डालते हैं। जानिए कौन से हैं वे पांच योग।
5 Dosh in Kundali: कुंडली में ये पांच दोष माने गए हैं बेहद खतरनाक, हो जाती है बुरे समय की शुरुआत,जानिए उपाय
काल सर्पदोष (kaal sarp dosh)
कुंडली में बनने वाले अशुभ दोषों में से कालसर्प दोष का नाम सुनकर ही लोग भयभीत हो जाते हैं। जब किसी की कुंडली में राहु और केतु एक साथ आ जाते हैं या फिर सभी शुभ ग्रह राहु और केतु की धुरी के भीतर होते हैं तो कालसर्प दोष का बनता है। ज्योतिष में बारह तरह के कालसर्प दोष बताए गए हैं। इसे दोष के कारण व्यक्ति को अपने जीवन में कई प्रकार के कष्टों का सामना करना पड़ता है। यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे कार्यों में बाधा, असफलता, तनाव, परिवार में कलह आदि का सामना करना पड़ता है। इस दोष के कारण व्यक्ति को गुप्त शत्रुओं का भय बना रहता है। यदि समय पर इस दोष का निवारण न किया जाए तो व्यक्ति को संघर्ष करते हुए जीवन व्यतीत करना पड़ता है।
कालसर्प दोष के अशुभ प्रभावों से बचने के उपाय-
यदि किसी की कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसे दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान गणेश और शिव जी का पूजन करना चाहिए। शिवलिंग पर दूध और मिश्री से अभिषेक करने के साथ ही शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा आप किसी योग्य ज्योतिष से सलाह लेकर कालसर्प दोष निवारण के लिए अनुष्ठान भी करवा सकते हैं।
मंगल दोष या कुज दोष (Mangal dosh)
ज्योतिष के अनुसार, जब किसी की कुंडली के लग्न भाव, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में कुज अर्थात् मंगल स्थित हो तो कुंडली में मंगल दोष लगता है। यह दोष विवाह के लिए बहुत अशुभ माना जाता है। विवाह में बाधा और वैवाहिक जीवन में कलह आदि मंगल दोष के सामान्य अशुभ प्रभाव हैं, लेकिन जब इस दोष में प्रबलता हो तब विवाह विच्छेदन की स्थिति बन सकती है। कुछ उपाय करके इस दोष के अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है।
मंगल दोष के प्रभाव से बचने के उपाय-
यदि किसी की कुंडली में मंगल दोष तो उन्हें हनुमान जी और मंगल देव का पूजन करना चाहिए, साथ ही मंगल के मंत्र ''ऊं भोमाय नमः'' का जाप करना चाहिए। मंगल दोष के कारण वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए शिव-पार्वती का संयुक्त रूप से पूजन करना चाहिए।
पितृ दोष (Pitra Dosh)
ज्योतिष के अनुसार माना जाता है कि जब किसी की कुंडली में सूर्य, चंद्र, शनि या राहु एक ही घर में उपस्थित हो तो पितृ दोष लगता है। कहा जाता है कि जिन लोगों से उनके पितर नाराज होते हैं उनकी कुंडली में पितृदोष का निर्माण होता है। ऐसी स्थिति में जातक को कार्यक्षेत्र और निजी जीवन में समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पितृ दोष के कारण घर में मांगलिक कार्य संपन्न नहीं हो पाते हैं और आर्थिक रूप से हानि का सामना करना पड़ता है।
पितृ दोष निवारण के उपाय-
यदि किसी की कुंडली में पितृ दोष लगा हो तो उसे अपने पितरों के निमित्त दान करना चाहिए और पिंड दान, श्राद्ध व पितृदोष निवारण जैसे धार्मिक अनुष्ठान करवाने चाहिए। अपने पितरों से भूल के लिए क्षमा याचना करनी चाहिए।
गुरु चांडाल दोष (Guru chandal Dosh)
कुंडली के अशुभ दोषों में से गुरु चांडाल दोष को भी बहुत नुकसानदायक माना जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में राहु और बृहस्पति के एक साथ होने से गुरु चांडाल दोष का निर्माण होता है। ज्योतिष के अनुसार, इस दोष के कारण कुंडली के अन्य शुभ योग नष्ट हो जाते हैं, जिसके कारण व्यक्ति के अपने जीवन में अत्यंत कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। गुरु चांडाल दोष के कारण व्यक्ति का धन व्यर्थ के कार्यों में खर्च होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति को पाचनतंत्र से जुड़ी गंभीर समस्याएं होने की आशंका रहती है।
गुरु चांडाल दोष के प्रभाव से बचने के उपाय-
यदि किसी की कुंडली में गुरु चांडाल दोष लगा हो तो उसे प्रत्येक गुरुवार के दिन बृहस्पतिदेव और भगवान श्री हरि विष्णु का पूजन करना चाहिए। बृहस्पतिवार के दिन पीली चीजों से गुड़, चने की दाल आदि का दान करना चाहिए। गाय को पीला भोजन करवाना चाहिए। इसके अलावा प्रतिदिन गायंत्री मंत्र या ऊं गुरुवे नमः मंत्र का जाप करना चाहिए। मान्यता है कि इससे गुरु चांडाल योग के अशुभ प्रभावों से मुक्ति प्राप्त होती है।