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वृषभ राशि में सूर्य, जानिए ज्योतिष और साधना में सूर्य का महत्व

Wed, 13 May 2020 05:18 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Wed, 13 May 2020 05:18 PM IST
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Sun transit in taurus and know significance of sun worship in astrology
surya puja

14 मई को सूर्य मेष राशि को छोडकर वृष राशि में आ रहें है। मेष राशि सूर्य की उच्च राशि है। सूर्य वृष राशि में 14 मई की शाम को प्रवेश करेंगे। शास्त्रों और ज्योतिष में सूर्य के राशि बदलने का काफी महत्व दिया गया है। शास्त्र कहते हैं कि केवल सूर्य की ही आराधना से सभी ग्रहदोषों से मुक्ति मिलती है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य और चन्द्र में दोनों में ही पूर्व के जन्मों के पाप शमन करने शक्ति रहती है। 'पूर्व जन्म कृतं पापं व्याधि रूपेण जायते' अर्थात पूर्व के जन्मों में किया गया पाप रोग के रूप में उत्पन्न होता है। इन्हें अर्घ्य देकर और प्रणाम करके ही प्राणी भवसागर से मुक्त हो जाता है। जैसे रत्नों का आश्रय मेरुपर्वत, आश्चर्यों का आश्रय आकाश, तीर्थों का आश्रय गंगा हैं उसी प्रकार सभी देवाताओं के आश्रय भगवान सूर्य हैं। देवगण भी भगवान सूर्य की ही आराधना करते हैं। इस चराचर जगत में सभी प्राणियों के ह्रदय के ही सूर्य का निवास है यही जगतात्मा हैं।


14 मई को सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें राशिनुसार इसका शुभ-अशुभ प्रभाव
Sun transit in taurus and know significance of sun worship in astrology
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वेदों और पुराणों में सूर्य का महत्व
वैदिक काल से भगवान सूर्य की उपासना का उल्लेख मिलता है। वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा और ईश्वर का नेत्र बताया गया है। सूर्य को जीवन, स्वास्थ्य एवं शक्ति के देवता के रूप में मान्यता हैं। सूर्यदेव की कृपा से ही पृथ्वी पर जीवन बरकरार है। ऋषि-मुनियों ने उदय होते हुए सूर्य को ज्ञान रूपी ईश्वर बताते हुए सूर्य की साधना-आराधना को अत्यंत कल्याणकारी बताया है। प्रत्यक्ष देवता सूर्य की उपासना शीघ्र ही फल देने वाली मानी गई है। जिनकी साधना स्वयं प्रभु श्री राम ने भी की थी। विदित हो कि प्रभु श्रीराम के पूर्वज भी सूर्यवंशी थे। भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब भी सूर्य की उपासना करके ही कुष्ठ रोग दूर कर पाए थे। 
14 मई को सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें राशिनुसार इसका शुभ-अशुभ प्रभाव
 
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surya - फोटो : surya

सूर्य की साधना का ज्योतिष में महत्व
शास्त्रों में कहा गया है कि सूर्यदेव की साधना से अक्षय फल मिलता है। भगवान भास्कर अपने भक्तों को सुख-समृद्धि एवं अच्छी सेहत का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को नवग्रहों में प्रथम ग्रह और पिता के भाव कर्म का स्वामी माना गया है। जीवन से जुड़े तमाम दुखों और रोग आदि को दूर करने के साथ-साथ जिन्हें संतान नहीं होती उन्हें सूर्य साधना से लाभ होता हैं। पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए सूर्य साधना पुत्र को करनी चाहिए। 

14 मई को सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें राशिनुसार इसका शुभ-अशुभ प्रभाव

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सूर्य साधना
वैदिक काल से ही भारत में सूर्य की पूजा का प्रचलन रहा है। पहले यह साधना मंत्रों के माध्यम से हुआ करती थी लेकिन बाद में उनकी मूर्ति पूजा भी प्रारंभ हो गई। जिसके बाद तमाम जगह पर उनके भव्य मंदिर बनवाए गए। प्राचीन काल में बने भगवान सूर्य के अनेक मन्दिर आज भी भारत में हैं। सूर्य की साधना-अराधना से जुड़े प्रमुख प्राचीन मंदिरों में कोणार्क, मार्तंड और मोढ़ेरा आदि हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रविवार का दिन सूर्य को समर्पित
रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है। इस दिन भगवान सूर्य की साधना-आराधना करने पर शीघ्र ही उनकी कृपा प्राप्त होती है। रविवार के दिन भक्ति भाव से किए गए पूजन से प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव अपने भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। 

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