जुबान पर शनि का नाम आते ही लोग डर से घबराने लगते हैं। उनके मन में तरह तरह के विचार पैदा होने लगते हैं कि कहीं उन पर तो शनि की छाया तो नहीं पड़ रही है। माना जाता है कि जिस किसी पर भी शनि की अशुभ छाया पड़ जाती है उसे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष के अनुसार ऐसा माना जाता है कि शनिदेव जिस किसी पर भी अपनी दृष्टि डालते हैं उसके सारे काम बिगड़ने लगते है। आर्थिक परेशानियां और बीमारियां घेरने लगती हैं। ज्योतिषशास्त्र में शनि को दण्डाधिकारी और कर्मफल दाता माना गया है। शनिदेव न्याय के देवता हैं यानि अच्छा कर्म करने पर शुभ फल और बुरा कर्म करने पर दण्ड भी देते हैं। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि शनि देव कुछ ऐसे लोगों पर हमेशा प्रसन्न रहते हैं और उन पर कभी उनकी बुरी छाया और साढ़ेसाती का का प्रभाव नहीं रहता है।
ऐसे लोगों पर शनि रहते हैं मेहरबान, नहीं होता साढ़ेसाती का प्रभाव, तीन राशियों पर विशेष कृपा
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मेहनत कर जीवन यापन करने वाले लोगों पर
शनि न्यायाप्रिय और काम के अनुसार फल देने वाले देवता हैं। सभी ग्रहों में शनि देव सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। यह लगभग ढाई सालों में अपनी राशि बदलते हैं। ऐसे में शनि के राशि बदलने पर सभी 12 राशियों में से कुछ राशियों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लग जाती है। शनि की साढ़ेसाती लगने पर व्यक्ति को कई तरह की परेशानियां और कष्ट भोगने पड़ते हैं। लेकिन ज्योतिषशास्त्र के अनुसार शनिदेव उन लोगों को ज्यादा कष्ट नहीं देते हैं जो मेहनती होते हैं। मेहनत करने वाले जातकों पर शनि की साढ़ेसाती लगने के बावजूद भी शनि उन्हें ज्यादा कष्ट नहीं पहुंचाते हैं।
सफाई रखने वाले जातकों पर
शनि देव ऐसे जातकों को ज्यादा कष्ट नहीं देते हैं जो हमेशा अपने नाखून को साफ-सुथरा रखते हैं। ज्योतिष के अनुसार जो लोग हमेशा अपने नाखूनों को दांतों से चबाते रहते हैं उन पर शनि की अशुभ छाया हमेशा रहती हैं। इसलिए शनिदोष से बचने के लिए हमेशा अपने नाखूनों को साफ करते रहना चाहिए और कभी भी उसे चबाना नहीं चाहिए।
न्यायप्रिय लोगों पर
ज्योतिष में शनि को न्याय का देवता माना गया है। यानी जो लोग हमेशा सच और न्याय का साथ देते हैं उन पर हमेशा शनि की कृपा बनी रहती हैं। जो लोग गरीबों और असहायों की हमेशा मदद करते रहते हैं उन पर कभी भी शनि की अशुभ छाया नहीं पड़ती है।
तीन राशियों पर विशेष कृपा
तुला राशि
राशिक्रम में तुला राशि सातवें क्रम की राशि है। तुला राशि शनिदेव की प्रिय राशि में से एक है। इस राशि के स्वामी शुक्रदेव है। इस राशि के जातक कर्मठ और ईमानदार होते हैं। ये काफी प्रतिभाशाली और प्रभावशाली व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। इस राशि पर शनि हमेशा प्रसन्न रहते हैं। कर्मठ स्वभाव के कारण शनिदेव इन पर विशेष कृपा बरसाते हैं। शनि की कृपा होने के कारण इनका भाग्य हमेशा साथ देता है। वहीं इस राशि का स्वामी शुक्र होने के कारण इनका जीवन सुख-सम्पन्नता और विलासितापूर्वक बीतता है। ऐसे में इस राशि के लोगों को शनि देव की पूजा अवश्य करनी चाहिए।