जब भी शनि की साढ़ेसाती का नाम आता है तो लोगों के मन में डर बैठ जाता है। शनि की साढ़ेसाती हर किसी के जीवन में एक बार जरूर आती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। यह किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। शनि को न्याय के देवता कहा जाता है क्योंकि यह न्यायप्रिय हैं। व्यक्ति के अच्छे कर्म करने पर अच्छा फल जबकि बुरे कर्म करने पर दण्ड देते हैं। आमतौर पर लोग शनि की साढ़े साती की बहुत ही कष्टकारी मानते हैं। लेकिन शनि की साढ़ेसाती व्यक्ति को सही दिशा में चलने की तरफ संदेश देते हैं। ज्योतिष के अनुसार शनि की साढ़ेसाती का सबसे बुरा प्रभाव छठे, आठवें और बारहवें भाव में माना जाता है इसके अलावा मकर, कुंभ, धनु और मीन लग्न में शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव ज्यादा बुरा फल नहीं देता जितना किसी अन्य लग्न में।
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ज्योतिषशास्त्र: जानिए कैसी होती है शनि की साढ़ेसाती, किन तीन राशियों पर है सबसे ज्यादा प्रभाव
Sun, 16 May 2021 06:29 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Sun, 16 May 2021 06:29 PM IST
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क्या है शनि की साढे़साती?
जातक की कुण्डली में चंद्रमा जिस राशि में जिस डिग्री पर बैठा है उससे 45 डिग्री की पहले में जब गोचर का शनि आता है तो शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है। यह 45 डिग्री के दायरे में आने के साथ शुरू होती है और चंद्रमा से आगे निकलकर 45 डिग्री दूर चली जाए, तब तक चलती है। यह समय कुल साढ़े सात साल का होता है, इसी कारण इसे साढ़ेसाती कहते हैं। एक राशि तीस डिग्री की होती है। शनि का एक राशि में भ्रमण ढाई साल का होता है। चंद्रमा के दोनों ओर डेढ़ डेढ़ राशि यानी 45 डिग्री तक इसका भ्रमण यह स्थिति पैदा करता है। यानि ढाई ढाई साल के तीन हिस्से किए जा सकते हैं।
जातक की कुण्डली में चंद्रमा जिस राशि में जिस डिग्री पर बैठा है उससे 45 डिग्री की पहले में जब गोचर का शनि आता है तो शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है। यह 45 डिग्री के दायरे में आने के साथ शुरू होती है और चंद्रमा से आगे निकलकर 45 डिग्री दूर चली जाए, तब तक चलती है। यह समय कुल साढ़े सात साल का होता है, इसी कारण इसे साढ़ेसाती कहते हैं। एक राशि तीस डिग्री की होती है। शनि का एक राशि में भ्रमण ढाई साल का होता है। चंद्रमा के दोनों ओर डेढ़ डेढ़ राशि यानी 45 डिग्री तक इसका भ्रमण यह स्थिति पैदा करता है। यानि ढाई ढाई साल के तीन हिस्से किए जा सकते हैं।
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इस समय धनु, मकर और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती
24 जनवरी 2020 से शनिदेव मकर राशि में हैं। मकर राशि शनि की राशि है। शनि के मकर राशि में विराजमान होने के कारण इस पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 तक रहेगी।
24 जनवरी 2020 से शनिदेव मकर राशि में हैं। मकर राशि शनि की राशि है। शनि के मकर राशि में विराजमान होने के कारण इस पर साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है। मकर राशि पर शनि की साढ़ेसाती 29 मार्च 2025 तक रहेगी।
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शनि के मकर राशि में भ्रमण करने की वजह से कुंभ राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। ज्योतिष गणना के अनुसार 3 जून 2027 तक कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती रहेगी।
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शनि के मकर राशि में होने से धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है। इसके बाद धनु राशि पर शनि की साढ़ेसाती 12 दिसंबर 2043 से 3 दिसंबर 2049 तक रहेगी।