फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Shani Sade Sati: साढ़ेसाती के दुष्प्रभाव से ऐसे बचें, जानें शनि साढ़ेसाती के लक्षण, प्रभाव और उपाय

Sun, 16 May 2021 11:13 AM IST
रुस्तम राणा पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली
पं. मनोज कुमार द्विवेदी, ज्योतिषाचार्य, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sun, 16 May 2021 11:13 AM IST
विज्ञापन
Shani Sade Sati here are important Facts of Shani Sade Sati effects and remedies
शनि साढ़ेसाती - फोटो : अमर उजाला

ज्योतिष की दुनिया में शनि की साढ़ेसाती सबसे ज्यादा डराने वाला बिंदू है। नवग्रहों में शनि को महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। कलियुग में शनि का सबसे ज्यादा प्रभाव है। शनि के पिता सूर्य और माता छाया हैं इसलिए इसे छायानंदन भी कहा जाता है। शनि की कहानियां वेद, पुराण और धर्मशास्त्रों में मिलती हैं, लेकिन जनमानस में इसके बारे में बहुत सारे भ्रम भी व्याप्त हैं। हर जातक जीवन में कम से कम तीन बार साढ़े साती के प्रभाव में आता है। जन्म कुण्डली के चंद्रमा पर शनि के प्रभाव को साढ़ेसाती के रूप में देखा जाता है। मेरे पास अधिकतर लोग यह प्रश्न लेकर आते हैं कि साढ़ेसाती का क्या प्रभाव होता है, किन जातकों पर साढ़ेसाती का अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, किन जातकों पर कम प्रभाव पड़ता है, कौनसे जातक साढ़ेसाती से अप्रभावित होते हैं। क्या साढ़े सात साल का पूरा समय एक जैसा खराब रहता है। अगर नहीं तो कौनसा समय अधिक कठिन होता है और कौनसा समय अपेक्षाकृत अनुकूल होता है। इन सभी विषयों पर हम इस लेख में चर्चा करेंगे।

Shani Sade Sati here are important Facts of Shani Sade Sati effects and remedies
शनि साढ़ेसाती के लक्षण और उपाय - फोटो : सोशल मीडिया
क्या है साढे़ साती?

पहले हम यह जान लें कि साढ़ेसाती होती क्या है। जातक की कुण्डली में चंद्रमा जिस राशि में जिस डिग्री पर बैठा है उससे 45 डिग्री की पहले में जब गोचर का शनि आता है तो शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है। यह 45 डिग्री के दायरे में आने के साथ शुरू होती है और चंद्रमा से आगे निकलकर 45 डिग्री दूर चली जाए, तब तक चलती है। यह समय कुल साढ़े सात साल का होता है, इसी कारण इसे साढ़ेसाती कहते हैं। एक राशि तीस डिग्री की होती है। शनि का एक राशि में भ्रमण ढाई साल का होता है। चंद्रमा के दोनों ओर डेढ़ डेढ़ राशि यानी 45 डिग्री तक इसका भ्रमण यह स्थिति पैदा करता है। यानि ढाई ढाई साल के तीन हिस्से किए जा सकते हैं।

Shani Sade Sati here are important Facts of Shani Sade Sati effects and remedies
साढ़ेसाती के लक्षण और उपाय - फोटो : सोशल मीडिया
शनि का चंद्रमा पर प्रभाव 

साढ़े साती हमें अधिक मेहनत करने के लिए विवश करती है। शनि न्याय का देवता है और चंद्रमा मन का। इसी मन पर शनि का क्रूर प्रभाव हम साढ़ेसाती में देखते हैं। जब हम समय के साथ दौड़ नहीं पाते तो अपनी स्वाभाविक लय को खो बैठते हैं। इसे ही खराब समय कहा जाता है। किसी व्यक्ति पर साढ़ेसाती का बुरा प्रभाव है या नहीं यह जांचने के लिए एक बहुत आसान रास्ता है। जातक से पूछा जाए कि अभी क्या समय हुआ है। साढ़ेसाती से पीड़ित अधिकांशत: इसका गलत जवाब देंगे। अगर शनि खराब प्रभाव नहीं कर रहा है तो जवाब सही आएगा। इस फार्मूले को निकालने के पीछे ठोस कारण यह है कि खराब शनि हमारे सेंट्रल नर्वस सिस्टम पर आक्रमण करता है और हमारे दैनिक कार्य करने में भी परेशानी आने लगती है। इसी से शुरू होती है टाइमिंग की समस्या। यानि गलत समय पर आप सही जगह पर पहुंचते हैं या सही समय पर गलत जगह पर। यह साढ़ेसाती का दूसरा बड़ा संकेत है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Shani Sade Sati here are important Facts of Shani Sade Sati effects and remedies
साढ़ेसाती के लक्षण और उपाय - फोटो : अमर उजाला
साढ़ेसाती का भय 

यह तो मैंने बताया कि समस्या कहां दृष्टिगोचर होती है और कैसे होती है। अब सवाल कि इससे डरा क्यों जाए और डरा क्यों न जाए। पहले सवाल का जवाब है कि जब पता चल गया कि शनि की साढ़ेसाती टाइमिंग और टाइम सेंस को खराब करती है तो सबसे पहले इसी पर चेक लगाया जाए। यानि इसे दुरुस्त करने के जमीनी उपाय शुरू कर दिए जाएं प्लान बनाकर काम किए जाएं और जहां जाएं वहां समय नष्ट करने की बजाय पूर्व में पूरी जानकारी एवं समय लेकर पहुंचा जाए। इसी तरह के खुद के मैनेजमेंट के हजारों उपाय हैं। इससे साढ़ेसाती का असर नब्बे प्रतिशत तक कम हो जाएगा।

विज्ञापन
Shani Sade Sati here are important Facts of Shani Sade Sati effects and remedies
साढ़ेसाती के लक्षण और उपाय - फोटो : twitter
शास्त्रों में शनि देव

शनिदेव को विशेष तौर पर संचित पाप कर्मों का फल प्रदान करने का अधिकार दिया है। इसलिए शनिदेव दंडाधिकारी कहलाते हैं। वे मृत्यु के देवता यमराज के दूतों में अग्रज हैं, इसलिए महर्षि वेदव्यास ने नवग्रह स्तोत्र में उन्हें ‘यमाग्रज’ कहा है। नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।। ज्योतिष शास्त्र में तमोगुण की प्रधानता वाले क्रूर ग्रह शनि को दुख का कारक बताया गया है। वह देव, दानव और मनुष्य आदि को त्रास देने में समर्थ हैं शायद इसीलिए उन्हें दुर्भाग्य देने वाला ग्रह माना जाता है। किंतु वास्तव में शनिदेव देवता हैं। मनुष्य के दुख का कारण स्वयं उसके कर्म हैं, शनि तो निष्पक्ष न्यायाधीश की भांति बुरे कर्मों के आधार पर वर्तमान जन्म में दंड भोग का प्रावधान करते हैं। 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Astrology News in Hindi related to daily horoscope, tarot readings, birth chart report in Hindi etc. Stay updated with us for all breaking news from Astro and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed