Flowers For Shani Dev Puja: शनि देव को सूर्य का पुत्र और कर्मों के अनुसार न्याय देने वाला ग्रह कहा गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति को अपने किए गए कर्मों का फल शनिदेव से ही प्राप्त होता है। जब कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ होती है, तब जीवन में रोग, आर्थिक तंगी, कर्ज, मानसिक तनाव और शत्रुओं की वृद्धि जैसी समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं। इसी अशुभ प्रभाव को शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या कहा जाता है।
Shani Dev Remedies: ये फूल दिलाएंगे शनि की साढ़ेसाती और ढैया के प्रकोप से छुटकारा, जानें उपाय
Shani Dev Puja Flower: शनिवार के दिन शनि देव की सच्चे मन से पूजा करने और उन्हें विशेष फूल अर्पित करने से उनके कठोर प्रभाव में कमी आती है। सही विधि और श्रद्धा के साथ की गई पूजा से शनि दोष शांत होता है और जीवन में आ रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने लगती हैं।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नीले रंग का अपराजिता फूल शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। शनिवार के दिन शनि मंदिर में जाकर या घर पर पूजा करते समय अपराजिता का फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। इस दौरान “ॐ शनैश्चराय नमः” मंत्र का नियमित जाप करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती व ढैय्या का नकारात्मक प्रभाव कम करने लगते हैं। यह उपाय मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है।
शनि जयंती या किसी भी विशेष शनिवार को शनि देव को शमी के फूल और पत्ते चढ़ाना अत्यंत फलदायी होता है। शमी वृक्ष को शनि से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। पूजा के समय शमी के पत्ते, फूल या उसकी जड़ अर्पित करने से शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे व्यक्ति के जीवन से दुख, भय और आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं तथा धन में वृद्धि के योग बनते हैं।
गुड़हल का फूल
इसके अलावा, शनिवार के दिन शनि देव को गुड़हल का फूल चढ़ाना भी लाभकारी बताया गया है। इस उपाय से शनि की कृपा प्राप्त होती है और कुंडली में मौजूद शनि दोष कमजोर पड़ता है। नियमित रूप से यह उपाय करने से कार्यक्षेत्र में स्थिरता और अच्छे परिणाम मिलने लगते हैं।
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आक का फूल
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
मान्यता के अनुसार आक का फूल भी शनिदेव को अर्पित किया जा सकता है। शनिवार के दिन आक का फूल चढ़ाने से शनि की कड़ी दृष्टि का प्रभाव कम होता है। ऐसा माना जाता है कि इससे साढ़ेसाती और ढैय्या से राहत मिलती है और व्यक्ति के जीवन में रुके हुए कार्य आगे बढ़ने लगते हैं। शनिदेव प्रसन्न होकर भाग्य के बंद द्वार खोल देते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं।