शनिदेव की साढ़ेसाती का नाम आते ही प्राणी किसी न किसी कारण से बेचैन होने लगते हैं कि ये साढ़ेसाती उनके लिए शुभ रहेगी या अशुभ। सत्य ये है कि इनकी साढ़ेसाती, ढैया और मारकेश दशा के रूप में गोचरकाल प्राणियों के अच्छे बुरे कर्मों के अनुसार उन्हें पुरस्कार तथा दंड देने के लिए ही आता है। प्राणी के कर्म अच्छे हैं तो अशुभ प्रभाव कम होगा और उसे अच्छे फल मिलेंगे किंतु, प्राणियों के कर्म ज्यादा बुरे हैं तो अशुभ प्रभाव अतिशय पीड़ादाई होगा। जानें शनि की साढ़ेसाती और उनके गोचर काल के प्रभाव के बारे में।
11 मई को शनि होंगे वक्री, किन राशियों पर रहेंगे भारी और किन व्यक्तियों को देंगे सबसे ज्यादा कष्ट
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क्या है शनि की साढ़ेसाती-
अपने गोचरकाल में शनिदेव एक राशि पर ढाई वर्ष रहते हैं। जब यह आपकी जन्म राशि से पहले, दूसरे और बारहवें स्थानों में भ्रमण करते हैं तो यह काल साढ़े सात वर्ष का रहता है और इसे ही साढ़ेसाती कहते हैं। ज्योतिष सूत्र के अनुसार द्वादशे जन्मगे राशौ द्वितीये च चनैश्चरः। सार्द्धानि सप्तवर्षाणि तदा दुःखैर्युतो भवेत्।
शनि साढ़े साती और ढैय्या से बचने के लिए शनि धाम कोकिलावन में कराएं तेल अभिषेक
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शनि गोचर से बारहवें स्थान पर हों तो सिर पर, जन्म राशि पर हों तो हृदय पर और जन्म राशि से द्वितीय स्थान में हों तो पैर पर उतरती साढ़ेसाती के रूप में अपना प्रभाव डालते हैं। जन्म राशि से चतुर्थ और अष्टम स्थानों पर गोचर करते हुए शनि की ढैया रहती है, जो ढ़ाई वर्ष तक चलती है यह भी जातक के लिए अति कष्टकारी रहती है।
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शनि का पाया विचार-
शनि के राशि परिवर्तन के समय यदि चंद्रमा पहले, छठे और ग्यारहवें स्थान में हो तो सोने का पाया, दूसरे, पांचवें में तथा नवम स्थान में हो तो चांदी के पाये पर गोचर करते कहलाते हैं। जब शनिदेव तीसरे, सातवें एवं दसवें स्थान में हों तो तांबे का पाया और चौथे, आठवें तथा बारहवें स्थान में हो तो लोहे के पाए पर गोचर करते हुए माने गए हैं। सोने के पाए पर हों तो सुखों को देने वाले, चांदी के पाये पर गोचर करते हुए सौभाग्य बढ़ाने वाले और तांबे के पाए पर गोचर करते हुए शनि मध्यम फल देते हैं। जबकि लोहे के पाए पर गोचर करते हुए शनि अनेक प्रकार के कष्ट एवं धन हानि करते हैं।
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राशियों पर इनका प्रभाव-
- यदि शनि जातक के जन्म के समय मिथुन, कर्क, कन्या, धनु अथवा मीन राशि पर गोचर कर रहे हों तो मध्यम फलदाई होते हैं।
- मेष, सिंह और वृश्चिक पर गोचर करते हुए शनिदेव प्रतिकूल प्रभाव देने के लिए तत्पर रहते हैं।
- वृषभ, तुला, मकर और कुंभ राशि वालों के लिए शनि हमेशा लाभदायक रहते हैं इन राशियों में इनके गोचर करते समय जो जातक जन्म लेते हैं उनके जीवन में एक समय ऐसा अवश्य आता है जब ये जातक को रंक से राजा बना देते हैं। ऐसे व्यक्तियों के जीवन में आकस्मिकता का प्रभाव सर्वाधिक रहता है। लोग जनप्रिय होते हैं और छोटे स्तर से कार्य करके कामयाबी की बुलंदी तक पहुंचते हैं।